छोटे परिवार के बड़े फायदे को लेकर जिले की महिलाएं परिवार नियोजन के उपायों को आसानी से अपना रही हैं। पिछले छह वर्षों के दौरान जनपद में सबसे अधिक महिलाओं ने नसबंदी को अपनाया है।
वहीं महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में नसबंदी के प्रति संकोच देखा जा रहा है। छह वर्षो में 14 हजार 224 महिलाओं ने नसबंदी को अपनाया। जबकि मात्र 28 पुरुषों ने नसबंदी कराने में ही रुचि दिखाया।
जनसंख्या स्थिरता के मद्देनजर परिवार नियोजन को बढ़ावा दिया जा रहा है। सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर गर्भनिरोधक के अस्थाई, स्थाई साधन मुफ्त प्रदान किए जाते हैं । महिला व पुरुष दोनों को सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध गर्भ निरोधकों के बारे में सलाह दी जाती है, ताकि अपनी पसंद के गर्भ निरोधक का चुनाव कर सकें।
जनपद के छह साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2024-25 में 4558, वर्ष 2023-24 में 2341, वर्ष 2022-23 में 789, वर्ष 2021-22 में 2461, वर्ष 2020-21 में 2086, वर्ष 2029-20 में 1989 सहित 14224 महिलाओं ने नसबंदी को अपनाया।
पुरुष नसबंदी मामले के आंकड़ों पर नजर डाला जाए तो वर्ष 2024-25 में 20, वर्ष 2023-24 में शून्य, वर्ष 2022-23 में 03,वर्ष 2021-22 में 03,वर्ष 2020-21 में 01, वर्ष 2019-20 में 01 सहित 28 पुरुषों ने नसबंदी कराया।
विभाग की मानें तो भ्रांतियां हैं कि पुरुष नसबंदी से शारीरिक कमजोरी आती है। इस भ्रांति को मन से निकालकर यह जानना बहुत जरूरी है कि महिला नसबंदी की अपेक्षा पुरुष नसबंदी अत्यधिक सरल और सुरक्षित है।
इसलिए दो बच्चों के जन्म में पर्याप्त अंतर रखने के लिए और जब तक बच्चा न चाहे तब तक परिवार नियोजन का प्रयोग करें। अगर पुरुष की नसबंदी के विफल होती है तो स्वास्थ्य विभाग की तरफ से उसे साठ हजार रुपये प्रदान किया जाता है।
यही नहीं नसबंदी के बाद सात दिनों के अंदर मृत्यु हो जाती है तो पीड़ित परिवार को चार लाख रुपये प्रदान किया जाता है। नसबंदी के आठ से 30 दिन के अंदर मृत्यु हो जाने पर एक लाख रुपये की धनराशि देने का प्रविधान है।
पुरुष नसबंदी पर दो हजार, जबकि महिला नसबंदी पर 1,400 रुपये मिलते हैं। पुरुष नसबंदी करवाने पर लाभार्थी को दो हजार रुपये उसके खाते में दिए जाते हैं। पुरुष नसबंदी के लिए चार योग्यताएं प्रमुख है। पुरुष विवाहित होना चाहिए।
उसकी आयु 60 वर्ष या उससे कम हो और दंपती के पास कम से कम एक बच्चा हो, जिसकी उम्र एक वर्ष से अधिक हो। पति या पत्नी में से किसी एक की ही नसबंदी होती है।
इसके अलावा आशा, एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी पुरुष नसबंदी के लिए प्रेरक की भूमिका निभाती हैं उन्हें भी 300 रुपये देने का प्रविधान है। पुरुष नसबंदी के लिए समय-समय पर जागरूकता अभियान भी चलाया जाता है।
हर 21 तारीख को वर्ष 2020 से ही खुशहाल परिवार दिवस भी मनाया जा रहा है। इसके बावजूद पुरुष वर्ग नसबंदी में दिलचस्पी नहीं ले रहा है। महिलाएं जागरूक हो रही हैं। वह अधिकाधिक नसबंदी करा रही है।
पुरुष नसबंदी के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाता है। महिलाएं जागरूक हो रही हैं। टीम बनाकर लोगों को प्रेरित किया जाएगा।
-डॉ. वीके यादव, उप मुख्य चिकित्साधिकारी मऊ