मऊ। जिला अस्पताल के आईसीयू वार्ड की क्षमता दोगुनी की जाएगी। चार बेड वाले आईसीयू में पिछले तीन महीने में 160 मरीज भर्ती हो चुके हैं। जिला अस्पताल के आईसीयू वार्ड में भी मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।
तीन दशक के बाद शुरू हुए जिला अस्पताल का आईसीयू वार्ड में क्षमता से अधिक मरीज भर्ती हो रहे हैं। हालात यह कि शुरू होने के 90 दिन में चार बेड वाले आईसीयू वार्ड में 160 मरीज भर्ती हो चुके हैं। इसको लेकर अब अस्पताल प्रबंधन ने आईसीयू वार्ड से सटे वार्ड-4 को आईसीयू वार्ड में बदलने जा रहा है। इससे आईसीयू वार्ड की क्षमता दोगुनी हो जाएगी। इसके साथ ही दो वेंटिलेटर की मांग को लेकर जिला प्रशासन के साथ शासन को भी इस मांग से अवगत करा दिया गया है। तीन माह पहले शुरू हुए आईसीयू वार्ड के वजह से गंभीर रेफर मरीजों की संख्या में 40 फीसदी तक गिरावट भी आई है।
बताते चलें कि 100 बेड के जिला अस्पताल में एक दशक पहले आईसीयू भवन ब्लड बैंक के बगल में बना दिया गया था, लेकिन इसका संचालन शुरू नहीं हो सका। उधर, कोरोना काल में दो वेंटिलेटर भी पीएम केयर फंड से अस्पताल को मिले लेकिन मानव संसाधन के अभाव में यह शोपीस बना रहा। काफी प्रयास के बाद एक जुलाई 2025 को डॉक्टर्स डे पर जिला अस्पताल में चार बेड के आईसीयू वार्ड का शुभारंभ दो वेटिंलेटर के साथ आईएमए अध्यक्ष डॉ एससी तिवारी, सचिव डॉ कंचन लता आजाद और सीएमएस डॉ धनंजय कुमार ने किया था।
अस्पताल प्रबंधन के विलंब से ही सही लेकिन शुरू हुए इस प्रयास ने जिला अस्पताल में आने वाले गंभीर मरीजों को एक बड़ी राहत दी है। सकारात्मक परिणाम यह है कि जुलाई से सितंबर तक 90 दिनों में इस चार बेड के आईसीयू वार्ड में 160 मरीज भर्ती हो चुके हैं। लेकिन चार बेड के आईसीयू वार्ड होने से यह अब मरीजों की संख्या लगातार बढ़ने के चलते छोटा पड़ रहा है। अस्पताल प्रबंधन ने सटे वार्ड चार के कक्ष को आईसीयू वार्ड में तब्दील कर यहां चार बेड बढ़ाने की योजना पर कार्य शुरू कर दिया गया है। सीएमएस डॉ. धनंजय कुमार ने बताया कि वर्तमान में दो बेड पर वेंटिलेटर की सुविधा है, चार बेड बढ़ने पर यहां दो ओर वेंटिलेटर की मांग को लेकर प्रशासन-शासन को मांग पत्र भेजा गया है।
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भर्ती होने वालों में 70 फीसदी मरीज हार्ट अटैक और हाई बीपी के
आईसीयू वार्ड के प्रभारी और सीनियर फिजिशियन डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि आईसीयू वार्ड में भर्ती होने वाले मरीजों में 70 फीसदी मरीज इमरजेंसी में आने वाले हार्ट अटैक, हाई बीपी के मरीजों की संख्या ज्यादा है। बताया कि रेफर होने वाले मरीजों की संख्या में 40 फीसदी की कमी आई है। गंभीर रूप से घायल मरीजों को रेफर किया जा रहा है। बताया कि इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) के संचालन को लेकर काफी समय तैयारी की जा रही थी। उनको पहले ही लखनऊ जबकि डॉ शैलेश कुशवाह और डॉ रमेश यादव को पीजीआई आजमगढ़ में प्रशिक्षण दिया गया था।
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1000 की ओपीडी, हर दिन तीन से चार मरीज होते हैं रेफर
अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 1000 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। आज तक सरकारी अस्पताल में आईसीयू की सुविधा उपलब्ध नहीं होने से तीन से चार मरीज गंभीर हालात में रेफर होते थे। आईसीयू की सुविधा से अब हार्ट अटैक, सांस उखड़ने, सड़क दुर्घटना में घायल या गंभीर रूप से बीमार मरीजों को उपचार के लिए बीएचयू या फिर निजी अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ रहा है। आईसीय में भर्ती अब तक 160 मरीजों में 50 फीसदी महिला, 30 फीसदी पुरुष तो 20 फीसदी युवा शामिल हैं।
शुल्क
सरकारी: जिला अस्पताल के आईसीयू का शुल्क निशुल्क है
निजी: अस्पतालों में 5000 से लेकर 10 हजार तक का चार्ज है एक दिन का