अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट नंबर एक रामराज ने पत्नी की हत्या के मामले में नामजद तीन आरोपियों में पति को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा के साथ ही 10 हजार रुपया अर्थदंड निर्धारित किया। एक आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। वहीं एक आरोपी की मौत हो जाने के चलते उसके विरुद्ध मुकदमे की कार्रवाई समाप्त कर दी गई।
मामला मधुबन थाना क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार बलिया जनपद के नगर थाना क्षेत्र क्षेत्र के डुमरिया बोझ गांव निवासी भोला गौड़ पुत्र गुलाब चंद की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज हुई। वादी का कथन है कि उसकी लड़की रेनू को दहेज के लिए उसके पति अशोक गौड़, संगीता पत्नी धुरेद्रें और धुरेंद्र उर्फ धीरेंद्र गौड़ पुत्र हरिशंकर तथा ननद नीलम मिलकर प्रताड़ित करती रही। इस दौरान 12 जून 2016 को सभी ने मिलकर जहर देकर उसकी पुत्री रेनू को मार डाला। पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कर बाद विवेचना पति अशोक गौड़ , संगीता और धुरेंद्र उर्फ धीरेंद्र के विरुद्ध आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। नीलम के विरुद्ध आरोपों में नहीं प्रेषित किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए एडीजीसी फौजदारी ने नौ गवाहों को पेशकर अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष से कहा गया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है । एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्को को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपी पति अशोक गौड को मारपीट और हत्या का दोषी पाया। दोषी पाए जाने के बाद अशोक गौड को आजीवन कारावास की सजा के साथ ही दस हजार रूपया अर्थदंड निर्धारित किया। वही आरोपी संगीता को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया । एक आरोपी धुरेंद्र गौड की दौरान मुकदमा मौत हो जाने के चलते उसके विरुद्ध मुकदमे की कार्रवाई समाप्त कर दी गई थी।