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कैसे दूर होगा कोरोना: बिना जांच के ही अस्पताल से छोड़े जा रहे मरीज

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मऊ। कोरोना संक्रमितों को उपचार के नाम पर अस्पताल में भर्ती तो किया जा रहा, लेकिन बिना जांच कराए मरीजों को सातवें दिन रिहाकर दिया जा रहा। अस्पताल से छूटने वाले मरीज समझते है, कि वो तो ठीक हो गए। जबकि हकीकत यह है कि उपचार कराने के बाद भी मरीज मरीज ही रहता है, वो किसी को संक्रमित करने की क्षमता रखता है।
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सीएमओ डॉ. एससी सिंह ने बताया कि दरअसल सात दिनों में मरीज के हालात के बारे में पता चल जाता है, ऐसे में यदि लक्षण में सुधार दिखने पर मरीज को अस्पताल से सात दिनों तक क्वारंटीन रहने की सलाह देकर छोड़ा जाता हैं। यह पूछने पर कि यदि मरीज के पास क्वारंटीन रहने की कोई व्यवस्था न हो तब वह ऐसे में क्या करेगा ?
इस पर सीएमओ डॉ. एससी सिंह ने कहां की तब तो कम से कम मरीज को दस दिनों तक अस्पताल में या होम आइसोलेशन में रहना चाहिए। इसके बाद ही मरीज के अंदर मौजूद वायरस समाप्त होंगे। जबकि हकीकत यह है कि ज्यादा से ज्यादा मिल रहे मरीजों को उपचार के नाम पर अस्पताल में रखा जा रहा। सात दिन के अंदर यदि लक्षण में कमी हो रही, तो बिना ठीक हुए मरीज को इस लिए अस्पताल से डिस्चार्ज किया जा रहा, ताकि और होने वाले संक्रमितों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती किया जा सके। कोरोना महामारी चरम पर है, प्रतिदिन लोग बीमारी से संक्रमित हो रहे, ऐसे में जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. बृज कुमार ने बताया कि किट के अभाव में ट्रूनाट मशीन ठप पड़ी है। सीएमएस ने बताया किट मंगाने के लिए सीएमओ को पत्र भेजा गया है।
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