मऊ। एक तरफ जिले में तेजी से मौसम बदला है। वहीं दूसरी तरफ लग्न और विवाह के सीजन में लोग जमकर पकवानों का लुफ्त उठा रहे हैं। मौसम की तल्खी और अनियिमित खानपान ने लोगों की सेहत पर बुरा असर डाला है। जिला चिकित्सालय की इमरजेंसी में डायरिया मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अधिकतर मरीज उल्टी, दस्त और डायरिया से जुड़े हुए आ रहे हैं। चिकित्सकों की ओर से अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों के इलाज में पूरी सतर्कता बरती जा रही है।
जिला अस्पताल में औसतन रोजाना 600 से अधिक मरीजों की जांच और उपचार किया जाता है। लेकिन मौसम में होने वाले बदलाव के बाद से अस्पताल की ओपीडी में इन दिनों 900 से 1000 मरीज रोजाना अस्पताल पहुंच रहे हैं। तापमान के लगातार बढ़ने के कारण गर्मी में होने वाली बीमारियों के मरीज आ रहे है। अस्पताल की ओपीडी से लेकर इमरजेंसी में मरीज ज्यादा आ रहे हैं।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. अनील कुमार बताते हैं कि अस्पताल में आने वाले करीब 50 फीसद मरीज डायरिया वाले हैं। बताया कि आने वाले मरीजों की स्थिति के आधार पर दवा दी जा रही है। कुछ मरीज ऐसे आते हैं जिनको सामान्य दवा देने पर ही राहत मिल जा रही है। सामान्य दवा नहीं लेने पर इंजेक्शन लगाना पड़ता है। कुछ ऐसा ही हाल अस्पताल के इमरजेंसी का भी है, जहां वार्ड में भर्ती मरीज भी डायरिया की चपेट में आने से भर्ती हैं। सुबह अस्पताल खुलने के बाद से तीमारदार मरीज को लेकर डॉक्टर का इंतजार कर रहे हैं। अस्पताल प्रशासन द्वारा ऐसे मरीजों के उपचार में आपातकाल में सतर्कता बरती जा रही है।
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हद जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकले। घर से बाहर निकलने पर पूरे शरीर का ढककर ही निकले। ज्यादा ठंडे पानी का सेवन न करें। गला हमेशा गिला करते रहे और प्यास न लगे इसके लिए पन्ना, शिकंजी, फलों के साथ ही तरबूज, नाशपाती, खीरा, ककड़ी, गाजर का खूब सेवन करें।
डॉ. अनील कुमार
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डॉ. आरके गुप्ता के चैंबर में बाहरी दे रहा था परामर्श
मऊ। जिला अस्पताल में चिकित्सकों की देर से आने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बृहस्पतिवार को अस्पताल खुलने के दो घंटे बाद भी जनरल सर्जन डॉ. आरके गुप्ता अपने कमरे में नहीं मौजूद थे। कोई बाहरी व्यक्ति उनके चेंबर में मरीजों का उपचार कर रहा था। बाहर चिकित्सक का इंतजार कर मरीज जब भी चिकित्सक के बारे में पूछताछ करते तो वह कोई जवाब नहीं दिया जा रहा था।
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कोट
तापमान में बढ़ने के बाद से डायरिया के मरीजों की संख्या बढ़ी है। ऐसे मरीजों के उपचार के लिए अस्पताल में सभी प्रकार की दवा उपलब्ध हैं। चिकित्सक के परामर्श पर मरीज का उपचार हो रहा है।
- डॉ. धनंजय कुमार, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक