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कृषि विरोधी अध्यादेश को सरकार लें वापस

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मधुबन। अखिल भारतीय किसान सभा एवं खेत मजदूर यूनियन के राष्ट्र ब्यापी आंदोलन के क्रम में भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को उपजिलाधिकारी लालबाबू दुबे को ज्ञापन सौंपा।
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इस मौके पर जिला मंत्री गुफरान अहमद ने कहा कि देश एक दशक से अभूतपूर्व मंदी के दौर से गुजर रहा है। बड़े उद्योग सेवा क्षेत्र भी सरकार की गलत नीतियों के चलते औंधे मुंह गिरा हुआ है। सबसे खराब हालत कृषि क्षेत्र की है। जिसपर देश की आबादी का 68 फीसदी और कार्य शक्ति का 52 फीसदी निर्भर करता है। इस अवसर पर स्टेट कौंसिल सदस्य राम नारायण सिंह ने कहा कि कोरोना वायरस की आड़ में सरकार ने कृषि क्षेत्र के किसानों और कृषि मजदूरों, दस्तकारों से खुला लूट शुरू कर दिया है।
एक सप्ताह के भीतर पेट्रोलियम पदार्थों में 15रुपया प्रति लीटर के इजाफा के साथ ही अन्य मानव जीवन में उपयोग आने वाली वस्तुओं के दामों में हो रहा इजाफा सरकार की कुंठावादी नीति को उजागर करता है। कृषि विरोधी अध्यादेश को सरकार वापस लें। कोविड 19 से पीड़ित मरीजों को प्रतिमाह 7500 रुपया और छह माह तक 10 किलो अनाज प्रत्येक परिवार को मुहैया कराएं। मनरेगा मजदूरों को 200 दिनों का कार्य दिया जाए। सभी किसानों मजदूरों दस्तकारों का पंजीकरण और बुजुर्गों के लिए दस हजार मासिक पेंशन दिया जाए। इस मौके पर शेख हिसामुद्दीन, अली मुहम्मद, महातम चौहान, एकराम अहमद, पंचदेव मौर्य, चंद्रिका यादव आदि रहे।
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