अमिला नगर पंचायत के वार्ड संख्या-5 अब्दुल कलाम नगर में लगभग 40 लाख रुपये की लागत से निर्मित मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) सेंटर एक वर्ष बाद भी अपनी उपयोगिता साबित नहीं कर सका है।
प्रतिदिन पांच टन ठोस कचरे के प्रसंस्करण की क्षमता रखने वाला यह केंद्र वर्तमान में शोपीस बनकर रह गया है। जबकि नगर क्षेत्र में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं।
नगर पंचायत की ओर से डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण तो किया जा रहा है, लेकिन एकत्रित कचरा एमआरएफ सेंटर तक नहीं पहुंच रहा है। इसके बजाय नगर के आबादी वाले क्षेत्रों और मुख्य मार्गों के किनारे कई स्थानों पर कूड़ा डाला जा रहा है।
कई बार इन कूड़े के ढेरों में आग लगा दी जाती है, जिससे उठने वाला जहरीला धुआं लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन रहा है और पर्यावरण प्रदूषण भी बढ़ रहा है।
एमआरएफ सेंटर में कचरे के निस्तारण और रिसाइक्लिंग के लिए सिंगल शाफ्ट श्रेडर मशीन, फटका मशीन, बेलिंग प्रेस मशीन और कन्वेयर मशीनें स्थापित की गई हैं, इसके बावजूद केंद्र का संचालन प्रभावी ढंग से शुरू नहीं हो सका है। हालत यह है कि केंद्र में वर्तमान समय में नाममात्र का भी कचरा संग्रहित नहीं है।
बरसात का मौसम नजदीक है। यदि खुले में कूड़ा डंप करने और जलाने का कार्य जारी रहा तो दुर्गंध और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। एमआरएफ सेंटर प्राथमिक विद्यालय से लगभग 50 मीटर की दूरी पर स्थित है, जहां प्रतिदिन सैकड़ों बच्चे पढ़ने आते हैं। ऐसे में कचरे का अनुचित प्रबंधन बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
सीमा विस्तार के बाद कूड़ा उठान बड़ी समस्या
नगर पंचायत का सीमा विस्तार होने के बाद इसका क्षेत्रफल लगभग 11.537 वर्ग किलोमीटर हो गया है, जबकि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार आबादी 20,884 है। बावजूद इसके कूड़ा संग्रहण व्यवस्था मुख्य रूप से पुराने नगर क्षेत्र तक ही सीमित दिखाई दे रही है। विस्तारित क्षेत्रों से कूड़ा उठान की व्यवस्था अभी भी अपेक्षित स्तर पर नहीं पहुंच सकी है। इस संबंध में नगर क्षेत्र के सुरेंद्र कुमार, नितिन राम, राजू और लक्ष्मण प्रसाद का कहना है कि एमआरएफ सेंटर को पूर्ण रूप से संचालित कर नगर के ठोस अपशिष्ट का वैज्ञानिक प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए, ताकि लाखों रुपये की लागत से बनी यह परियोजना अपने उद्देश्य को पूरा कर सके।
कोट
नगर क्षेत्र में लोगों को जागरूक किया जा रहा है, ताकि लोग डोर-टू-डोर कूड़ा गाड़ियों को कूड़ा दें, जिससे अधिक से अधिक कचरा एमआरएफ सेंटर तक पहुंच सके।
-मनोज कुमार, अधिशासी अधिकारी, नगर पंचायत अमिला