फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अजीत की हत्या के बाद पूर्वांचल में गैंगवार की आशंका

विज्ञापन
विज्ञापन
मऊ/मुहम्मदाबाद गोहना। पूर्व ज्येष्ठ उप ब्लॉक प्रमुख अजीत सिंह की लखनऊ में हत्या के बाद पूर्वांचल में गैंगवॉर की आशंका बढ़ गई है। हत्या में .32 और 9 एमएम की पिस्टल के इस्तेमाल से यह जाहिर होता है कि पेशेवर हत्यारों ने घटना को अंजाम दिया होगा। हालांकि अजीत के साथ साये की तरह रहने वाले मुहम्मदाबाद के भदीड़ गांव निवासी मोहर सिंह की तहरीर पर जेल में निरुद्ध आजमगढ़ के कुख्यात अपराधी ध्रुव सिंह उर्फ कुंटू सिंह, तरवा क्षेत्र निवासी पूर्व ब्लॉक प्रमुख अखंड प्रताप सिंह और पेशेवर अपराधी कन्हैया शर्मा उर्फ गिरधारी उर्फ डॉक्टर के अलावा दो अज्ञात बदमाशों के खिलाफ हत्या और हत्या की साजिश का मुकदमा दर्ज किया गया है।
विज्ञापन

अजीत सिंह की हत्या किन कारणों से की गई है और इसमें किसका हाथ है, इसका खुलासा जांच के बाद ही हो सकेगा लेकिन हत्या में नामजद कुंटू सिंह का नाम आना कोई संयोग नहीं है। करीब दस वर्ष से दोनों के बीच अदावत चल रही थी। 2005 में मुहम्मदाबाद गोहना ब्लॉक क्षेत्र पंचायत प्रमुख पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित होने के बाद उस समय जेल में बंद अजीत सिंह ने कुंटू सिंह की आर्थिक मदद और बाहुबल के दम पर अपनी पत्नी रानू सिंह को पहले बीडीसी चुनाव निर्विरोध जितवाया, फिर ब्लाक प्रमुख बनवाने में सफल रहे। कुछ समय बाद पैसों के लेनदेन और क्षेत्र पंचायत में कुंटू सिंह की दखलंदाजी और जबरन ठेके को लेकर अजीत सिंह की कुंटू सिंह से ठन गई। इस बीच कई मौके आए जब दोनों आमने-सामने आए। सबसे अधिक विवाद मुहम्मदाबाद गोहना रोडवेज स्थित शराब की दुकान को लेकर हुआ। इस दुकान का लाइसेंस अजीत सिंह कोलॉरा निवासी अपने मामा श्याम नारायण सिंह के नाम कराने में सफल रहे। लाखों की आमदनी वाली शराब दुकान हाथ से फिसलता देखकर कुंटू सिंह बौखला गया। उसने श्याम नारायण को धमकाना शुरू किया। जिससे अजीत सिंह मैदान में उतर आए और कुंटू सिंह के विरुद्ध धमकी, हत्या की साजिश सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज करा दिया।
2010 के ब्लॉक प्रमुख चुनाव में क्षेत्र पंचायत प्रमुख का पद अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित होने के बाद अजीत सिंह ने यहां से किनारा कर लिया। वह शराब और जमीनों की खरीद-फरोख्त के धंधे से जुड़ने के साथ राजनीति में सक्रिय होने लगा। इसके बाद वर्ष 2015 में ब्लाक प्रमुख चुनाव में अपनी करीबी पिछड़ी जाति की महिला को चुनाव लड़वाया और काफी बड़े अंतर से जीत हासिल की। इस बीच उसका रुतबा तो बड़ा ही साथ ही राजनीतिक और आर्थिक समृद्धि भी बढ़ गई, लेकिन दुश्मनी का डर हमेशा रहा। इसीलिए वह वाहनों का काफिला लेकर निकलता था। उसमें दर्जनों असलहाधारी सवार रहते थे। इस बीच अपराध के पूर्व रिकार्ड को देखते हुए पुलिस की रिपोर्ट पर 31 दिसंबर को जिलाधिकारी ने उसे जिला बदर कर दिया। जिससे वह लखनऊ स्थित आवास पर रहने लगा। अजीत की हत्या के बाद क्षेत्र के लोग दहशत में हैं उनका कहना है कि गैंगवॉर अब और तेज होगा।
विज्ञापन

अजीत पर आजमगढ़ में दर्ज हैं हत्या के दो मामले
मऊ। लखनऊ में गैंगवॉर में मारा गया अजीत सिंह मुहम्मदाबाद गोहना कोतवाली का हिस्ट्रीशीटर था। उसके विरुद्घ 19 मुकदमे दर्ज हैं। इनमें आजमगढ़ में हत्या के दो मामलों के अलावा अधिकतर छोटे आपराधिक मामले हैं। वर्ष 2005 से राजनीति में सक्रिय होने के दौरान अजीत ने बसपा का दामन थामा था।
पुलिस अधीक्षक मऊ सुशील घुले ने बताया कि मऊ में भले ही अजीत के खिलाफ 15 मामले दर्ज हैं लेकिन कोई जघन्य मामला दर्ज नहीं है। उन्होंने बताया कि आजमगढ़ में दर्ज हत्या के दो मामलों में अजीत सिंह के साथ कुंटू सिंह नामजद है। इससे स्पष्ट है कि कुंटू और अजीत के बीच गहरे रिश्ते थे। उन्होंने बताया कि शासन के आदेश पर अपराधियों के विरुद्घ चलाए जा रहे अभियान के चलते अजीत पर दर्ज मामलों को देख दस दिन पूर्व अजीत को जिलाधिकारी अमित सिंह बंसल ने जिला बदर किया था। फिलहाल गैंगवॉर के बाद से अजीत के बारे में और जानकारी के लिए पुलिस को सक्रिय किया गया है। अभी तक पता चला कि अजीत देवसीपुर गांव स्थित अपने घर पर कम ही रहता था।
विज्ञापन

-
अजीत के विरुद्घ मुहम्मदाबाद गोहना कोतवाली में दर्ज मामले
अपराध संख्या 431/03 धारा 147, 148, 149, 504, 506, 307 भादंवि
अपराध संख्या 211/2004 - 25 आर्म्स एक्ट,
अपराध संख्या 915/ 2005- 110 सीआरपीसी
अपराध संख्या 348/2008- 110 सीआरपीसी
अपराध संख्या 333/ 09- 110 सीआरपीसी
अपराध संख्या-381/ 09- गुंडा एक्ट
अपराध संख्या- 1579/10- 342, 387, 506 भादवि
अपराध संख्या- 312/2008- 467, 468, 468, 471 भादवि, 3/ 7 ईसी एक्ट
अपराध संख्या- 777/ 2011- गुंडा एक्ट
अपराध संख्या- 281/2017- 110 सीआरपीसी
अपराध संख्या- 27/ 19- गुंडा एक्ट
अपराध संख्या- 128/ 19- 110 सीआरपीसी
अपराध संख्या- 1055/ 2014- 147, 352, 323 भादवि और 7 सीएलए एक्ट
अपराध संख्या- 277/2013- 110 सीआरपीसी
अपराध संख्या- 98/2012- 110 सीआरपीसी
--
आजमगढ़ में में दर्ज मामले
अपराध संख्या 1071/ 2008- 302 120 बी आईपीसी कोतवाली, आजमगढ़
अपराध संख्या 152/10 - 302 120 बी आईपीसी थाना जीयनपुर, आजमगढ़
अपराध संख्या- 340/ 10 - गैंगस्टर एक्ट थाना जीयनपुर, आजमगढ़
लखनऊ में दर्ज मामला
अपराध संख्या 536/2005- धारा 365 आईपीसी जीआरपी चारबाग, लखनऊ
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें