मऊ। कर्जमाफी की घोषणा के पहले और बाद में एक तरफ जहां बैंक किसानों के कर्ज माफ करने के मामले को लेकर उलझे रहे वहीं दूसरी तरफ किसान लोन के लिए बैंकों का चक्कर काट रहे थे। इसके चलते जरूरत के समय अधिकांश किसानों को समय से लोन नहीं मिला। सरकार बनने के बाद अब जाकर कुछ तेजी आई है। किसानों को लोन के साथ ही फसल बीमा के तहत प्रीमियम भी काटा जा रहा है ताकि किसी आपदा के समय उनके फसल का सही मुआवजा दिया जा सके।
रतनपुरा ब्लाक के अईलख गांव निवासी रामप्रकाश सिंह का कहना है कि वह भाजपा की प्रदेश में सरकार बनने के पहले से ही बैंक में किसान क्रेडिट कार्ड के लिए दौड़ रहे हैं। लेकिन अभी तक उनका केसीसी नहीं बन पाया है। यही हाल कमोवेश अतरौला पांडेय गांव निवासी शिवबचन सिंह का भी है। उनका कहना है कि कई बैंकों ने तो किसान लोन माफ कर दिए जाने की घोषणा के बाद से ही किसानों को लोन देना बंद कर दिया था। अब जाकर कुछ किसानों का केसीसी बन रहा है लेकिन अभी भी किसान आए दिन बैंक का चक्कर काट रहे हैं।
रतनपुरा ब्लाक निवासी प्रवीण कुमार कहते हैं कि वह अपनी फसल के लिए कई महीने से केसीसी के लिए दौड़ लगा रहे हैं। बैंक आश्वासन के शिवाय अभी तक कुछ नहीं दे सका है। किसान नेता देवप्रकाश राय कहते हैं कि भाजपा ने जब किसानों के कर्ज माफी की घोषणा की तभी से उनका रवैया किसानों को कर्ज देने के प्रति बदल गया। यही नहीं बैंकों ने कई किसानों का जबरन बकाया आरसी काटने के नाम पर जमा करा लिया ताकि उन्हें इसका लाभ भविष्य में न मिले। ऐसे किसानों को चिह्नित कर उन्हें भी ऋण माफी का लाभ दिया जाना चाहिए। घोषणा के बाद जिन-जिन किसानों ने अपना बकाया भुगतान किया था उनका पैसा लौटाया जाना चाहिए।
इनसेट
किसानों को ऋण देने संबंधी केसीसी योजना जिले में संचालित हैं। सरकार बनने के बाद 15 हजार किसानों ने लोन एवं बीमा के लिए आवेदन किया है। इनमें हजारों किसानों को केसीसी का लाभ दिया गया है। वहीं 95 लाख बीमा का भी प्रीमियम कटा है। किसानों को ऋण देने में आनाकानी करने वाले बैंकों की शिकायत मिली तो उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
-आशुतोष द्विवेदी मुख्य विकास अधिकारी