Mau News: इस जुगाड़ और अत्याधुनिक तकनीक के बेजोड़ नमूने को देखने के लिए भी लोगों की भीड़ लग गई। लोगों ने इस जुगाड़ तकनीक की काफी सराहना की। कहा कि जिस तरीके से मौसम में बदलाव हो रहा है उसमें यह जुगाड़ तकनीक किसानों के लिए लाभदायक बन सकती है।
अप्रैल के महीने में गेहूं की कटाई और मढ़ाई का काम तेजी से चल रहा है। अन्नदाता मौसम के रूप को देखते हुए खड़ी फसलों की कटाई के साथ उसकी मढ़ाई और फसलों को बचाने में दिन रात लगा हुआ है।
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कहा जाता है कि आवश्यकता ही आविष्कार की जननी होती है, ऐसे में मौसम की मार से बचने के लिए किसान अत्यधिक के साथ जुगाड़ तकनीक का भी सहारा खूब ले रहे हैं।
शुक्रवार को एक ऐसा ही नजारा जनपद के कोपागंज विकासखंड क्षेत्र के चौबेपुर गांव में देखने को मिला, जहां अन्नदाता अपनी भूसे और गेहूं दोनों को बचाने के लिए इस जुगाड़ तकनीकी से काम करने में लग रहे। थ्रेसर में जगह से भूसा निकलता है वहां से करीब 17 से 18 फीट के टीन शेड लगाया गया और उसे एक कुर्सी के सहारे टिका दिया गया, जिससे भूसा की उड़ने की संभावना बिल्कुल समाप्त हो गई।
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वहीं, दूसरी तरफ गेहूं को भी संरक्षित कर एक बोरे में रखा जाने लगा। इस नई तकनीकी का जुगाड़ करने वाले मनोज उर्फ बिल्डर और किस पंकज ने बताया कि मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में हल्की बारिश और तेज हवा की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में बारिश होने से जो गेहूं की फसल कट चुकी है, उसमें कीड़े लगने के साथ खराब होने की प्रबल संभावना होती है।
बता दें कि जनपद में लगभग पिछले तीन से चार दिनों से 30 से 32 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं। आमतौर पर गेहूं की मढ़ाई का काम शाम ढलने के बाद ही किस कर रहे हैं। लेकिन मौसम के बदलते रुको देखते हुए किसान न तो दिन के इंतजार में है और ना ही रात के इंतजार में। वह तो बस अत्यधिक के साथ जुगाड़ तकनीकी का सहारा लेकर अपनी फसल और भूसे की बढ़ाने की जब दो जहर में लगा हुआ है।