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घटनाओं के बाद भी जिला अस्पताल में नहीं हो सका सुरक्षा व्यवस्था

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मऊ जिले के सबसे बड़े सरकारी जिला अस्पताल में ऐसे सुरक्षाकर्मियों की तैनाती नहीं होने से चिकित्सक तथा कर्मचारी दहशत में रहते हैं। अस्पताल में कई बार इमरजेंसी या ओपीडी में उपचार के दौरान मरीज के साथ आए परिवारजनों द्वारा चिकित्सकों तथा स्वास्थ्य कर्मियों से अभद्रता तथा मारपीट की घटनाएं हो चुकी है। इतना ही नहीं इमरजेंसी में एक बार कुछ मनबढ़ों द्वारा फायरिंग करने की घटना भी की जा चुकी है। चिकित्सकों द्वारा कई बार इस समस्या को लेकर अस्पताल प्रबंधन से सुरक्षा व्यवस्था के साथ पुलिस प्रशासन से पुलिस चौकी बनाने की मांग कर चुके है। लेकिन अब तक दोनों में से किसी पर किसी जिम्मेदार कोई अमल नहीं किया गया।
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जिले में करीब 25 लाख की आबादी पर एक जिला अस्पताल, महिला जिला अस्पताल तथा नौ सीएचसी सहित 52 सरकारी अस्पताल संचालित हो रहे है। इसमें वर्तमान में महिला जिला अस्पताल को छोड़कर कहीं भी सुरक्षा का व्यवस्था नहीं है। सुरक्षा व्यवस्था न होने से सबसे ज्यादा दिक्कत जिला अस्पताल में हो रही है। यहां आए दिन इमरजेंसी में उपचार कराने पहुंचने वाले मरीजों द्वारा चिकित्सकों तथा स्वास्थ्यकर्मी से अभद्रता के मामले घटित होते रहते हैं।
इतना ही नहीं कुछ माह पूर्व उपचार कराने के लिए गए कुछ मनबढ़ों द्वारा इमरजेंसी ड्यूटी कर रहे एक चिकित्सक से अभद्रता करने के साथ हवाई फायरिंग की घटना की गई थी। इसके अलावा बीते माह ही एक किशोर की मौत से नाराज परिजनों ने विरोध प्रदर्शन किया था। इसके अलावा भी पूर्व में कई बार अभद्रता की घटनां घट चुकी है, जिसको लेकर प्रांतीय चिकित्सा संवर्ग संघ द्वारा अस्पताल प्रबंधन से लेकर जिला प्रशासन को लिखित शिकायत कर सुरक्षा व्यवस्था मुहैया कराने की मांग कर चुके है। इस दौरान चिकित्सकों का कहना था कि अगर पुलिस चौकी अस्पताल परिसर में आई तो अस्पताल में होने वाली घटनाओं को जहां आसानी से रोका जा सकेगा वहीं अस्पताल परिसर में अराजक तत्वों का लग रहा जमावड़ा भी समाप्त हो जाएगा।
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वर्तमान में कोई सुरक्षा व्यवस्था न होने से जिला अस्पताल परिसर पूरी तरह से अराजक तत्वों की शरणगाह बना हुआ है। काफी दिनों से अस्पताल व्यवस्था को पूरी तरह से अराजकतत्व जकड़े हुए हैं। यही नहीं आए दिन मनमानी की जाती है। मरीजों के साथ भी सलीका व्यवहार नहीं किया जाता है। प्राइवेट एंबुलेस का भी यहां खेल चलता है। इसके अलावा प्राइवेट में जांच के नाम पर धनादोहन जहां किया जाता है वहीं बड़े अस्पतालों के एंबुलेंस यहां घूमते रहते हैं और रात में मरीजों को लेकर प्राइवेट अस्पताल में चले जाते हैं।
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सीएमएस डॉ. बृज कुमार का कहना था कि दो पुलिस जवानों की इमरजेंसी में ड्यूटी रहती है। पुलिस चौकी बनाने के लिए पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजा जा चुका है।
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