मऊ। मार्च माह के तीसरे सप्ताह में ही तापमान बढ़ने के चलते लोगों की परेशानी बढ़ती ही जा रही है। तापमान 32 डिग्री सेल्सियस पहुंचने से चर्म रोगियों की संख्या बढ़ रही है। जिला अस्पताल में रोजाना चर्म रोग से ग्रसित 150 से ज्यादा मरीज इलाज कराने पहुंच रहे हैं। अधिकांश मरीज दाद, खुजली और लाल दाने निकलने की दवा लेने आ रहे हैं।
चिकित्सक का कहना है कि गर्मी बढ़ने के साथ ही मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। लेकिन जिला अस्पताल में चर्म रोग विशेषज्ञ का पद रिक्त चल रहा है। अस्पताल प्रशासन की तरफ से शासन को पत्र भेजकर मामले से पल्ला झाड़ लिया जा रहा है।
जिला अस्पताल में रोजाना 900 मरीजों की ओपीडी है। मार्च में ही तेजी से तापमान बढ़ने से 150 से अधिक चर्म रोग के मरीज आ रहे हैैं। जिला अस्पताल में दो वर्ष से चर्म रोग विशेषज्ञ का पद रिक्त है।
जिला अस्पताल प्रशासन पूर्व में तैनात चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. एके रंजन का ट्रांसफर होना बताया जा रहा है। अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक न होने से मरीजों का इलाज सही ढंग से नहीं हो पा रहा है।
वर्तमान में दाद, खाज, खुजली, त्वचा पर एलर्जी के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि तापमान में जैसे-जैसे बढ़ेगा वैसे ही गर्मी में एलर्जी होने से चेहरा लाल हो जाता है। इसके अलावा शरीर पर लाल रंग के दाने निकल आते हैं।
उन्होंने बताया कि सूर्य के प्रकाश में समाहित अल्ट्रा वॉयलेट किरणें हमारी त्वचा को नुकसान पहुंचाती हैं। दोपहर 12 से दोपहर बाद तीन बजे तक ये किरणें ज्यादा ही घातक हो जाती हैं। शरीर में पसीना जमकर सूख जाता है। इससे वहां फंगल हो जाते हैं। शरीर में जहां-जहां पसीना सूखता है वहां चर्म रोग के कीटाणु तेजी से पैदा होते हैं। तेज धूप से चमड़ी झुलस कर काली पड़ जाती है।
चिकित्सकों के टिप्स ऐसे करें बचाव
प्रतिदिन ताजे और ठंडे पानी से नहाएं।
नहाने के पानी में एंटीसेप्टिक की बूंदे डालें।
त्वचा के लिए एंटी बैक्टीरियल साबुन का प्रयोग करें।
अपनी मर्जी से दवा न लें।
पहले से संक्रमण है तो पहनने के कपड़ों को गर्म पानी में उबालकर धोएं और धूप में अच्छे से सुखाएं।