जिला अस्पताल स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र का वार्ड।
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कुपोषण को दूर करने में विभागीय अधिकारियों द्वारा केवल कार्रवाई की जा रही है। इससे कागजों पर तो हर माह कुपोषण दूर हो रहा है, लेकिन कुपोषण दूर करने के लिए बना पोषण पुर्नवास केंद्र खाली रह रहा है। इससे जिले में हजारों कुपोषित होने के बाद भी केवल हर माह 6 बच्चों का इसमें इलाज हो पा रहा है। जबकि 10 बेड वाले एनआरसी में हर माह 20 कुपोषित बच्चों का इलाज होना है। जिम्मेदारों की घोर उदासीनता के चलते कुपोषण दूर करने की कवायद में जिला के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा फिसड्डी घोषित कर 12 वां स्थान दिया है। इसके विपरित विभागीय अधिकारियों हर माह कुपोषण दूर होने का दावा कर रहे हैं।
चार अप्रैल को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के महानिदेशक द्वारा आयोजित बैठक में कुपोषण की समस्या से पीड़ित 17 जिलों की समीक्षा की गई थी। जहां मऊ जिले में कुपोषण दूर करने की कवायद में लापरवाही होना मिला। समीक्षा में जिले में मार्च 2019 तक 6544 अतिकुपोषित बच्चों तथा कुपोषित बच्चों की संख्या 28900 होने के बाद भी एनआरसी में केवल हर माह 6 बच्चे को भर्ती कराया जाना मिला। इसके चलते एनआरसी में इलाज का ग्राफ 25 प्रतिशत हो रहा है। जबकि 10 बेड के एनआरसी में हर माह से 20 बच्चों का इलाज होने का लक्ष्य निर्धारित है। वर्तमान में बुधवार को एनआरसी में केवल तीन बच्चे भर्ती है। विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि कुपोषण को दूर करने में फिसड्डी होने पर जिले को पहली बार खराब प्रगति वाला जिले की सूची में 12 वां स्थान दिया गया है।
वहीं, बाल पुष्टाहार विकास का दावा है कि हर माह 1 हजार अतिकुपोषित बच्चों की संख्या कम हो रही है। विभागीय आंकड़ों पर नजर डाले तो जिले के 2587 आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत 2 लाख 64 हजार 800 बच्चों में वर्तमान में मार्च माह तक 6544 अतिकुपोषित तथा 28 हजार 900 कुपोषित बच्चें होना दर्ज है।
आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2018 में अतिकुपोषित बच्चों की संख्या 8996 थी, जो कि जनवरी में 8212 तथा फरवरी में 7390 और मार्च में 6544 हो गई। वहीं दिसंबर में कुपोषित बच्चों की संख्या 34725 थी जो कि घटकर मार्च में 28900 तक पहुंच गई।
जिला कार्यक्रम अधिकारी केएम पांडेय ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा कुपोषित बच्चों को चिहिन्त कर उन्हें भर्ती कराने का प्रयास किया जा रहा है। कहा कि आरबीएसके टीम द्वारा इसमें लापरवाही बरती जा रही है। इसकी जांच कराई जाएगी।