मऊ। जिले में सरकारी अस्पतालों के मूल्यांकन के लिए इसी माह शासन की टीम पहुंचने वाली है। जो कायाकल्प योजना के अंतर्गत अस्पताल को विभिन्न बिंदुओं पर परखेगी। लेकिन अस्पतालों में हाईजीन और स्वच्छता को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। हालांकि वर्ष 2020-21 के मूल्यांकन में जिला महिला अस्पताल को मंडल में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ था। लेकिन हर वर्ष जिला अस्पताल फिसड्डी साबित हुआ है।
शासन से आने वाली टीम इसी माह किसी भी समय अस्पतालों का भौतिक सत्यापन कर सकती हैं। लेकिन जिला अस्पताल में साफ-सफाई और कचरा निस्तारण को लेकर कोई खास इंतजाम नहीं है। अस्पताल में हमेशा गंदगी का पर्याय है। जिला अस्पताल में आए दिन मरीजों को गंदे बेड पर ही भर्ती कर दिया जाता है। यहां तक की मरीजों को चादर तक उपलब्ध नहीं कराया जाता है। सफाई के अभाव में शौचालयों से बदबू आती रहती है। वहीं चिकित्सकों की कमी के कारण भी मरीजों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए अस्पताल में कोई ठोस प्रबंध नहीं किए गए हैं। वहीं महिला अस्पताल में भी इन दिनों काफी अव्यवस्था है। इसके साथ ही साफ-सफाई की भी समुचित व्यवस्था नहीं की जा रही है।
स्वच्छता सहित कई बिंदुओं पर होगा मूल्यांकन
मऊ। कायाकल्प योजना के तहत चिकित्सालय का साफ-सफाई, बायो मेडिकल वेस्ट निस्तारण, रखरखाव आदि विंदुओं पर निरीक्षण किया जाता है। टीम अस्पतालों के आपरेशन थिएटर, एसएनसीयू, पैथालोजी, ओपीडी सहित अस्पताल में संचालित सभी विभागों का गहनता से निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रेषित करती है। जिसके आधार पर अस्पतालों का मूल्यांकन किया जाता है। इसके साथ ही अस्पताल की पत्रावलियों के रखरखाव तथा मरीजों से चिकित्सकीय सेवाओं का फीडबैक भी लिया जाएगा।
जिला अस्पताल में नहीं है क्वालिटी मैनेजर
मऊ। सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर उपचार और स्वस्थ वातावरण उपलब्धता की निगरानी तथा गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए क्वालिटी मैनेजर तैनात रहते हैं। लेकिन जिला अस्पताल में क्वालिटी मैनेजर का पद एक वर्ष से खाली है। कायाकल्प योजना के तहत तीनों चरणों में 70 प्रतिशत से अधिक अंक मिलने पर अस्पताल को राज्य स्तर पर प्रशस्ति पत्र तथा पुरस्कार राशि दी जाती है। राशि की 75 फीसदी अस्पताल की खामियों को सुधार करने और 25 फीसदी प्रोत्साहन पर खर्च करना अनिवार्य है।
जिला अस्पाताल के सीएमएस बृजकुमार ने बताया कि जिला अस्पताल में क्वालिटी मैनेजर का पद पिछले एक वर्ष से खाली है। अस्पताल में साफ-सफाई की व्यवस्था की जाती है। मानव संसाधन के अभाव के बीच अस्पताल की व्यवस्थाओं को दुरूस्त करने का प्रबंध किया जा रहा है। चिकित्सकों और कर्मचारियों की तैनाती के लिए शासन को पत्र भेजा गया है।