हैरान करने वाला है शातिर अंदाज
पीड़ित ने बताया है कि इस घटना के कुछ दिन बाद ही उसे एक फोन आया, जिसने खुद को एसपी मऊ कार्यालय से होना बताकर उसकी गायब बेटी के प्रयागराज से बरामद होने की बात कही। साथ ही उसे प्रयागराज से मऊ लाने में दस हजार रुपये का खर्च होने की बात कही। जिस पर पीड़ित ने अपनी भतीजी को जल्द से जल्द घर लाने की उम्मीद में संबंधित फर्जी साइबर अपराधी के खाते में दस हजार रुपये का भुगतान कर दिया गया।
तीस मिनट बाद दोबारा कॉल करके भेजी गई राशि अपर्याप्त बताकर बीस हजार की मांग फिर की गई, जब पीड़ित व्यक्ति ने आनाकानी की तो उसकी भतीजी न मिलने की बात कही गई, जिसके बाद सहमकर उसने दोबारा पुलिसकर्मी के खाते में यह राशि भेज दी।
तीस हजार की राशि भेजने के 24 घंटे बाद अपनी भतीजी के न आने पर उसने घोसी पुलिस को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद उसे पता चला कि वह डिजीटल अरेस्ट का शिकार हुआ है। एसपी ने बताया कि ठगों ने आनलाइन दर्ज हुए मुकदमे के बारे में जानकारी कर पीड़ित परिवार के जज्बातों का सहारा लेकर उन्हें अपना शिकार बनाया।