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टापू में तब्दील हो गए मधुबन देवारा आधा दर्जन गांव

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दोहरीघाट / दुबारी। घाघरा का जलस्तर स्थिर रहने के बाद भी नदी के उग्र रुप धारण करने से तटवर्ती इलाके के लोगों की धड़कनें बढ़ती ही जा रही है। नदी की लहरें भारतमाता मंदिर की दीवारों पर टकरा रही है। इससे ऐतिहासिक धरोहरों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
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मधुबन तहसील क्षेत्र के हाहानाला पर जलस्तर बढ़ने से आधा दर्जन गांव टापू की शक्ल में तब्दील हो गए हैं। कई गांवों में पानी घुस जाने से लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। तटवर्ती इलाकों की लगभग एक हजार एकड़ से अधिक फसल जलमग्न होकर नष्ट होने से किसानों को नींद उड़ गई है। धर्मपुर दुबारी से लगभग तीन किमी एरिया में कटान होने से लोगों को भूमिहीन होने की चिंता सताने लगी है।
घाघरा का जलस्तर स्थिर रहने के बाद भी नदी के उग्र रुप धारण करने से लोग दहशत में जी रहे हैं। बुधवार को नदी का जलस्तर 69.95 मीटर रहा। वही मंगलवार को नदी का जलस्तर 69.95 मीटर रहा। जबकि खतरा बिंदु 69.90 मीटर है। घाघरा लाल निशान से पांच सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। नदी की लहरें भारत माता मंदिर की दीवारों पर टकरा रही है। इससे मुक्तिधाम, भारतमाता मंदिर, खाकी बाबा की कुटी, दुर्गा मंदिर, लोक निर्माण विभाग का डाक बंगला, हनुमान मंदिर, डीह बाबा का मंदिर सहित ऐतिहासिक धरोहरों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। वहीं घाघरा के तटवर्ती इलाके धनौली रामपुर, नई बाजार, नवली, बहादुरपुर, सरया, पतनई, ठाकुरगाव, बीवीपुर, ताहिरपुर, जमीरा चौराडीह, कोरौली, बेलौली, पाऊस, ठिकरहिया, महुआबारी, रसूलपुर, सूरजपुर सहित विभिन्न गांवों में बाढ़ आने की आशंका से लोग दहशत में हैं। मधुबन तहसील क्षेत्र का उत्तरी हिस्सा प्रत्येक वर्ष बाढ़ की चपेट में आता है। घाघरा का जल स्तर लगातार बढ़ने तटवर्ती इलाके के लोगों की परेशानी बढ़ती ही जा रही है। नदी का जलस्तर पर नजर डाला जाए तो बुधवार को 65.88 मीटर रहा। जबकि हाहानाला पर खतरा बिंदु 66.31 मीटर रहा। क्षेत्र के नई बस्ती धर्मपुर, सुग्गीचौरी,गोबरही, बइरकंटा, भगतपुरवा, बिशुन पुरवा, गजियापुर, अहिरुपुर बैरियाडीह, मर्यादापुर सहित तमाम संपर्क मार्ग जलमग्न हो गए हैं। वहीं उच्च प्राथमिक विद्यालय बैरियाडीह, मुडाडार मनियार, प्राथमिक विद्यालय खैरा दुबारी विद्यालय कैंपस में पानी घुस गया है। घाघरा में उफान से आधा दर्जन गांव टापू की शक्ल में तब्दील हो गए हैं तो कई गांव के संपर्क मार्गों पर पानी भर जाने से आना जाना मुश्किल हो रहा है। तटवर्ती गांवों की एक हजार एकड़ से अधिक फसल जलमग्न होकर नष्ट हो गई है।
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