जिला अस्पताल की डेंटल ओपीडी 18 माह से बंद चल रही है। इसके चलते दूरदराज से आने वाले दंत रोगी बैरंग लौट रहे। कारण डेंटिस्ट का ट्रेनिंग पर जाना और उसके स्थान पर किसी की तैनाती का न होना है। ऐसे में कई मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा। गरीबों की जेब ढीली हो रही। ऐसे में अस्पताल प्रशासन की लापरवाही मरीजों पर भारी पड़ रही है।
जिला अस्पताल के दंत विभाग में मरीजों के उपचार के लिए डॉ. सीपी आर्या की तैनाती की गई थी। वहीं दंत तकनीशियन के पद पर विनोद की तैनाती हुई थी। अस्पताल सूत्रों की माने तो बीते डेढ़ साल से ज्यादा समय से डॉ. सीपी आर्या पीजी कोर्स करने के लिए बाहर गए हुए थे।
इसके चलते अस्पताल में आने वाले मरीजों को दंत तकनीशियन द्वारा इलाज किया जा रहा था। लेकिन 6 माह पूर्व वो भी सड़क दुर्घटना में घायल होने के चलते दंत चिकित्सा विभाग केवल सफेद हाथी बनकर रह गया है। जबकि दंत रोगों से जुड़े बीमारी से रोजाना 100 से ज्यादा मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंचते है।
लेकिन उपचार के अभाव में वो निजी अस्पताल या फिर वापस घर लौटने को मजबूर हो रहे हैं। मरीजों की कई शिकायतों के बाद भी अस्पताल प्रबंधन द्वारा इसका वैकल्पिक उपाय करने का प्रयास नहीं किया जा रहा है।
दात से संबंधित रोगों के इलाज के लिए दंत विभाग में आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। आधुनिक एक्सरे मशीन भी लगाई गई है। दांतों के इलाज को आधुनिक चिकित्सा पद्धति रूट केनाल करने के लिए भी उपकरण उपलब्ध हैं। दंत रोगियों के इलाज के लिए एक दंत सर्जन और एक दंत तकनीशियन तैनात है।
जहां दुर्घटना में जबड़ा टूटने पर आपरेशन कर जोड़ने की भी सुविधा उपलब्ध है। लेकिन चिकित्सक न होने के चलते यह केवल उपकरण केवल शोपीस बन कर रह गए हैं।