कलेक्ट्रेट पर किसान बिल के विरोध में उत्तर प्रदेश किसान सभा के तत्वावधान मे आयोजित धरना प्रदर्श?
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मऊ। कृषि कानूनों के विरोध में शनिवार को वामपंथी दल और किसान संयुक्त मोर्चा ने कलेक्ट्रेट पर धरना देकर प्रदर्शन किया। इस दौरान वक्ताओं ने कृषि कानूनों को समाप्त नहीं करने की वजह मोदी सरकार की हठधर्मिता बताया। धरना प्रदर्शन करने के बाद राष्ट्रपति को संबोधित चार सूत्री मांगों का ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।
इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि भारत के किसान सामूहिक रूप से तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ते आ रहे हैं, जिन्हें केंद्र की भाजपा सरकार ने मनमाने तरीके से किसानों पर थोपा है। जबकि यह कानून देश की खेती-किसानी को खतरे में डालने का काम करेंगी। जिस पर देश की साठ फ़ीसदी आबादी निर्भर है। साथ ही करोड़ों खेत मजदूरों की रोजी रोटी बंटाई पर चलती है। आंदोलन करने के बाद भी सरकार ध्यान नहीं दे रही है। राष्ट्रपति को संबोधित डीएम को सौंपे गए ज्ञापन में मांग किया गया कि सभी कृषि कानूनों में बिजली के नियमों को रद्द किया जाए। सार्वजनिक उपक्रमों को अपने चहेते पूंजीपतियों के हवाले करना बंद किया जाए। आंदोलन में गिरफ्तार किसान और किसान नेताओं और पत्रकारों को तत्काल बिना शर्त रिहा किया जाए। जनता की दमनात्मक कार्रवाई बंद किया जाए । दिल्ली आंदोलन को बदनाम करने वाले अराजक तत्वों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए। धरना प्रदर्शन में मुख्य रुप से सरोज सिंह, अर्चना उपाध्याय, रामसोज यादव, शेर मोहम्मद, जयप्रकाश धुमकेतू, बसंत कुमार देवेंद्र मिश्रा, राम कुमार भारतीय, हिसामुद्दीन गुफरान, राम जी चौहान,परीक्षित व सिकंदर मनन आदि उपस्थित रहे।
वहीं मधुबन संवाददाता के अनुसार शनिवार को किसानों के समर्थन में भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष गया प्रसाद यादव के नेतृत्व में किसानों ने शहीद स्मारक पर पहुंचकर धरना दिया । इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकार किसान हितैषी बनने का ढोंग कर रहीं है । धरनें को मंडल महामंत्री मिथिलेश यादव के साथ अन्य ने संबोधित किया। इस दौरान मौके पर पहुंचे एसडीएम मधुबन लाल बाबू दुबे और प्रभारी निरीक्षक संजीव कुमार दुबे ने किसानों को समझा बुझा कर शांत कराया । इस दौरानफकिसान नेताओं ने उन्हे ज्ञापन सौंप कृषि कानून को खत्म कराने की मांग किया। धरना प्रदर्शन के दौरान रामनयन यादव, परमानंद यादव, जयप्रकाश आदि मौजूद रहे।