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मारपीट के मामले में सगे भाईयों सहित चार को आठ-आठ माह की सजा

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मऊ। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर तीन आराधना रानी ने मारपीट के मामले में नामजद चार आरोपियों को दोषी पाते हुए आठ-आठ माह की सजा के साथ ही कुल दो-दो हजार रुपया अर्थदंड निर्धारित किया। आरोपियों द्वारा पूर्व में जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित करने का आदेश दिया। वहीं गर्भपात हो जाने और जान से मारने की धमकी देने के मामले में सभी को दोषमुक्त कर दिया। मामला कोतवाली घोसी क्षेत्र का है।
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अभियोजन के अनुसार कोतवाली घोसी क्षेत्र के मिश्रौली डुमरा गांव निवासी कृपा देवी पत्नी लालसा चौहान की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज हुई। इसमें गांव के ही फेंकू, सीताराम और महेंद्र पुत्र लालचंद तथा रामनयन पुत्र भृगुनाथ को आरोपी बनाया। वादिनी का कथन है कि आरोपीगण ने पुरानी रंजिश को लेकर 25 दिसंबर 2010 को उसकी पिटाई की।
इससे उसके गर्भ में पल रहे शिशु की मौत हो गई। पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना के बाद आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए एडीजीसी फौजदारी ने कुल आठ गवाहों को पेशकर अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष से कहा गया कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। एडीजे ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपीगण फेंकू, सीताराम, महेंद्र और रामनयन को मारपीट और गाली देने का दोषी पाया।
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दोषी पाए जाने के बाद सभी को दोनो धाराओं में क्रमश: आठ-आठ माह की सजा के साथ ही कुल दो-दो हजार रुपया अर्थदंड निर्धारित किया। वही गर्भपात और जान से मारने की धमकी देने की धाराओं में संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। एडीजे ने आरोपियों द्वारा पूर्व में जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित करने का आदेश दिया। वहीं अर्थदंड जमा हो जाने पर आधी धनराशि को पीड़िता कृपा देवी को देने का आदेश दिया।
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