मल्टीनेशनल कंपनियों के प्रलोभन भरे वादों और विज्ञापनों के चक्कर में आकर कई बार उपभोक्ता सामान तो खरीद लेता है, लेकिन बाद में वह ठगा महसूस करता है।
कंपनियां प्रलोभन भरे वादे देकर लोगों की भावनाओं के साथ खेलती है, अगर उपभोक्ता जागरूक हो जाए तो कंपनियों को मुंह की खानी पड़ती है। जिले में खराब मोबाइल मिलने पर जुर्माना लगा साथ ही इलाज के दौरान सेवा में कमी मिलने पर डॉक्टर पर एक लाख रुपए जुर्माना लगाया था।
जिला उपभोक्ता फोरम में जहां एक हजार से अधिक मामलों का निस्तारण किया जा चुका है। वहीं लगभग 600 मामले लंबित है। उपभोक्ताओं को जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल 15 मार्च को विश्व उपभोक्ता जागरूकता दिवस का आयोजन किया जाता है।
उपभोक्ताओं को जागरूकता किया जाता है कि अगर वह जागरूक रहे और सामान खरीदने की रसीद ले ताकि खरीदे गए सामान मे कोई कमी आती है तो वह दुकानदार अथवा कंपनी से अपना सामान बदलवा सकते ऐसा न करने दुकानदार अथवा कंपनी के विरुद्ध उपभोक्ता न्यायालय में मुकदमा दायर कर अपने नुकसान की भरपाई कर सकेंगे। और मुकदमे का खर्च भी उपभोक्ता को मिलेगा।
ऐसे मे उपभोक्ता को अपने हितों के प्रति जागरूक होना पड़ेगा। जिला उपभोक्ता फोरम में वर्तमान समय में लगभग 600 मामले लंबित हैं। जिला उपभोक्ता फोरम के चेयरमैन ने बताया कि उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए जिला उपभोक्ता फोरम कार्य करता है।
जागरूक न होने का फायदा उठाती हैं कंपनियां और दुकानदार
उपभोक्ता मामलों के जानकार अधिवक्ता हरिद्वार राय ने बताया कि कंपनियां और दुकानदार लोगों की मासूमियत का फायदा उठाती हैं, इसलिए अगर किसी भी व्यक्ति को किसी भी कंपनी के माध्यम से ठगी का अहसास हो तो बेहिचक उसकी शिकायत करनी चाहिए। बताया कि आजकल आनलाइन प्लेटफार्म पर भी लोगों के साथ धोखाधड़ी हो जा रहे हैं। जिसमें कई मल्टीनेशनल कंपनियां शामिल हैं। अगर विधिक रूप से सभी कार्य किए हैं तो उपभोक्ता फोरम में ग्राहक को न्याय भी मिलता है।
केस वन - कोपागंज कस्बा निवासी अधिवक्ता अविनाश वर्मा ने बताया कि मै मोबाइल खरीदा था जो गड़बड़ मिल गया, संबंधित डीलर के यहां गया तो वह वापस नहीं किया। उपभोक्ता फोरम में वाद दायर किया तो उसे मोबाइल की कीमत 10 हजार 500 रुपये और मुकदमा का खर्च मिला।
केस दो - बलिया जनपद निवासिनी बिंदु देवी एक डाक्टर के विरूद्ध इलाज के दौरान सेवा मे कमी के बावत उपभोक्ता फोरम में वाद दायर किया था, जिस पर डाक्टर के विरुद्ध एक लाख रुपए का जुर्माना लगा, साथ उसे मुकदमा मे हुए खर्च भी मिला।
लोगो वाला कैरी बैग के लिए अतिरिक्त चार्ज उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत अनुचित
अधिवक्ता हरिद्वार राय ने बताया कि मॉल या ब्रांडेड स्टोर में खरीदारी करने पर अपने नाम या लोगो वाला कैरी बैग देने के लिए अतिरिक्त पैसे चार्ज करना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत अनुचित व्यापार प्रथा है। ग्राहक को बैग के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है, यह दुकानदार की जिम्मेदारी है कि वह सामान सुरक्षित दे। यदि बैग पर मॉल या ब्रांड का नाम छपा है, तो वे आपसे पैसे नहीं ले सकते। ब्रांडेड बैग के लिए 7 से 10 रुपया चार्ज करना अवैध है, इस पर कोर्ट जुर्माना लगा चुकी है। दुकानदार आपसे घर से थैला लाने के लिए कह सकते हैं, लेकिन बैग खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। यदि मॉल पैसे लेने के लिए मजबूर करता है, तो आप उपभोक्ता फोरम में शिकायत कर सकते हैं।