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Mau News: गबन और कब्जे के मामले में कॉलेज प्रबंधक को दो और लिपिक को तीन वर्ष की सजा

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नेहरू इंटरमीडिएट कॉलेज रतनपुरा के छात्रवृत्ति, सरकारी धन का गबन करने और विद्यालय की भूमि पर अवैध कब्जा करने के मामले में प्रबंधक राणा प्रताप सिंह और लिपिक बासु सिंह को दोषी पाए गए हैं। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. केपी सिंह ने दोषी पाए जाने के बाद प्रबंधक राणा प्रताप सिंह को दो वर्ष की सजा सुनाई, साथ ही 10 हजार रुपये अर्थदंड लगाया। वहीं लिपिक बासू सिंह को तीन वर्ष की सजा सुनाई और 10 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। मामला हलधरपुर थाना क्षेत्र का है।
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पुलिस उपाधीक्षक भ्रष्टाचार निवारण संगठन अवधेश नारायण सिंह की तहरीर पर एफआईआर दर्ज हुई थी। वादी के मुताबिक तत्कालीन विधायक सियर शारदानंद अंचल और खालिसपुर गांव निवासी कमलापति त्रिपाठी ने 4 मार्च 1990 को मुख्यमंत्री को संबोधित प्रार्थना पत्र देते हुए मामले की भ्रष्टाचार निवारण संगठन से जांच कराए जाने मांग की थी। जांच के बाद 9 जुलाई 1993 को हलधरपुर थाने में एफआईआर दर्ज हुई। आरोप था कि विद्यालय के प्रधानाचार्य राम सकल सिंह, प्रबंधक राणा प्रताप सिंह, सचिव जगदीश सिंह और लिपिक बासु सिंह ने मिलकर नेहरू इंटर कॉलेज रतनपुरा के छात्रों की छात्रवृत्ति एवं अन्य फंडों का अभिलेखों का राजकीय धन के गबन को छुपाने के लिए कर लिया। साथ ही विद्यालय की भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया है। विवेचना के दौरान प्रधानाचार्य राम सकल सिंह और सचिव जगदीश सिंह की मौत हो गई। भ्रष्टाचार निवारण संगठन ने मामले की जांच कर बाद विवेचना प्रबंधक राणा प्रताप सिंह और लिपिक बासू सिंह के विरुद्ध आरोप पत्र कोर्ट में भेजा। कोर्ट में छह गवाहों को पेशकर किया गया। बचाव पक्ष ने कहा कि उन्हें झूठा फंसाया गया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने प्रबंधक राणा प्रताप सिंह व लिपिक बासु सिंह को दोषी पाया।
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