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निजी अस्पताल आयुष्मान लाभार्थियों की पसंद

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मऊ। जिले में आयुष्मान योजना दम तोड़ रही है। सरकारी अस्पतालों में सुविधाएं न मिलने से लाभार्थियों की पसंद निजी अस्पताल बन रहे हैं। सितंबर 2018 से शुरू हुई योजना में चार साल में आठ हजार से ज्यादा ने उपचार कराया। अब तक तीन सरकारी अस्पतालों में एक भी लाभार्थी ने योजना में इलाज नहीं कराया।
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25 लाख की आबादी वाले जिले में आयुष्मान योजना में एक लाख 23 हजार 282 परिवार पंजीकृत है। इलाज के लिए जिले में जिला अस्पताल, महिला जिला अस्पताल के अलावा कोपागंज, मुहम्मदाबाद गोहना, रतनपुरा, घोसी व दोहरीघाट सीएचसी पंजीकृत है। नगर क्षेत्र के नौ निजी अस्पताल भी योजना में शामिल हैं। लेकिन आयुष्मान योजना का लाभ सरकारी अस्पतालों में मिलता नहीं दिख रहा है। इसके पीछे अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी, संसाधनों का अभाव, मौजूद चिकित्सक की रुखा स्वभाव है। हालत यह है कि सितंबर 2018 से शुरू इस योजना में 100 बेड के सबसे बड़े सरकारी जिला अस्पताल में न तो आंख से संबंधित मरीजों का उपचार हुआ न ही हड़्डी का। चार वर्ष में यहां 650 मरीजों का उपचार हो सका है, यहीं स्थिति महिला जिला अस्पताल की है। तीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फतेहपुर मंडाव, घोसी व रतनपुरा में अब तक एक भी लाभार्थी का उपचार नहीं हुआ है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो 25 सितंबर 2018 से शुरू इस योजना में आठ हजार 305 मरीजों का इसका लाभ मिल चुका है, लेकिन इसमें 6985 मरीजों का उपचार निजी अस्पताल में जबकि केवल 1323 मरीजों का उपचार सरकारी अस्पतालों में हुआ है। आयुष्मान योजना के प्रभारी डॉ. पीएन दुबे ने बताया कि योजना में अब तक आठ हजार 305 मरीजों का उपचार हो चुका है। उपचार हेतु 7.5 करोड़ रुपये का व्यय सरकार ने किया। बताया कि सरकारी अस्पताल में लाभार्थी जिला अस्पताल तो निजी अस्पताल में फातिमा अस्पताल मरीजों की पसंद है। आयुष्मान योजना के लाभार्थियों का उपचार जिले के 17 अस्पतालों में नि:शुल्क है। लेकिन इसका प्रचार प्रसार न होने से यह जानकारी लोगों से दूर है। कई लाभार्थी इलाज के लिए सरकारी अस्पताल का चक्कर काटते है, उन्हें मालूम ही नहीं है कि नगर के प्रमुख अस्पताल सहित नौ अस्पताल इस योजना के तहत शामिल है। जिसमें उन्हें नि:शुल्क सुविधा की व्यवस्था उपलब्ध है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एसएन दुबे ने कहा कि योजना के तहत लाभार्थी उपचार करा रहे है। एक दो ओर अस्पतालों को शामिल करने के लिए कवायद जारी है।
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