ब्लॉक में सम्पूर्ण रोजगार योजना के अंतर्गत 112 आवासो में किए गए फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर कर साढ़े ग्यारह लाख रूपये के फर्जीवाड़ा में हाईकोर्ट ने तत्कालीन व्लॉक प्रमुख सहित बीडीओ और लेखाकार के विरुद्ध केस दर्ज कराने का आदेश जिलाधिकारी को दिया है। लेखाकार वर्तमान में तैनात है, जबकि बीडीओ सेवानिवृत्त हो चुके है।
वित्त वर्ष 2007 -08 में अनुसूचित जाति, जनजाति के लोगों के लिए क्षेत्र पंचायत की ओर से संपूर्ण ग्रामीण योजना के अंतर्गत 112 आवासों का आवंटन किया गया था। इसमें अधिकारियों व कर्मचारियों ने 63 लाभार्थियों के फर्जी तरीके से जाति प्रमाण पत्र बनाकर साढ़े ग्यारह लाख रुपये की बंदरबाट कर लिया। इस संदर्भ में बोधित्व सेवा संस्थान के अध्यक्ष जितेंद्र गोयल ने तत्कालीन जिलाधिकारी को ज्ञापन देते हुए जांच की मांग की थी। जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सहायक अभियंता डीआरडीए और वीडीओ कोपागंज को जांच सौंपी। जो सही निकली।
इस पूरे मामले को संज्ञान में लेते हुए तत्कालीन परियोजना निदेशक द्वारा संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को बचाते हुए सभी 63 फर्जी लाभार्थियों पर एफआईआर दर्ज कराते हुए रिकवरी का आदेश दिया। इससे असंतुष्ट जितेंद्र गोयल ने संबंधित अधिकारियो व तत्कालीन व्लॉक प्रमुख के विरुद्ध भी कार्रवाई की मांग करते हुए हाईकोर्ट इलाहाबाद में रिट दाखिल की। याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्रा की अदालत ने जिलाधिकारी को तत्कालीन ब्लॉक प्रमुख सहित संबंधित वीडीओ और सहायक लेखाकार के विरुद्ध केस दर्ज करने का आदेश दिया। हाइकोर्ट के आदेश के बाद भी जिले के अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और पुरानी रिपोर्ट प्रेषित कर पल्ला झाड़ लिया।