पुलिस अब यह पता लगा रही है कि क्या वास्तव में ममता राय नामक कोई शिक्षिका भी है, जिसके नाम का दुरुपयोग रंभा ने किया या रंभा वैसे ही छद्म नाम रखकर धोखे से नौकरी करती रही। पुलिस इस बिंदु पर भी जांच कर रही है कि क्या महराजगंज में वास्तव में कोई ममता राय शिक्षिका है जिसकी 22 अगस्त 1995 को नियुक्ति का जिक्र है।
25 सालों से करती रही नौकरी: ममता राय के नाम पर रंभा पांडेय 25 सालों से नौकरी करती रही और विभाग के अधिकारियों को भनक तक नहीं लगी। महराज गंज से ममता राय के तबादला लेकर आई रंभा पांडेय बलिया जिले के ताखा गांव की निवासिनी है।
डीएम के आदेश पर जब बीईओ राकेश कुमार चतुर्वेदी 10 जून को ताखा गांव पहुंचे तो वहां ममता राय नाम की कोई महिला नहीं मिली। बीईओ ने ममता राय नामक शिक्षिका की फोटो दिखाया तो ग्राम प्रधान ने उसकी पहचान रंभा पांडेय के रूप में किया। यहीं से चली जांच में फर्जी शिक्षिका का भंडा फूट गया। डीएम के वाट्सऐप पर आई शिकायत पर विभागीय जांच की गई।