गर के भुजौटी स्थित राहुल सांकृत्यायन सृजन पीठ में आयोजित संवाद कार्यक्रम में अपनी बात रखते मुख्
मऊ। जन संस्कृति मंच (जसम) के तत्वावधान में भुजौटी स्थित राहुल सांकृत्यायन सृजन पीठ में बुधवार को संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विषय ‘21वीं सदी में पूंजीवाद का बदलता स्वरूप और श्रम आधारित समुदायों पर इसका प्रभाव’ रही। इसमें कथाकार रणेंद्र ने समतामूलक समाज के निर्माण में पूंजीवाद को सबसे बड़ा खतरा करार दिया।
रणेंद्र ने कहा कि आधुनिक साहित्य से मजदूर निरंतर गायब हो रहे हैं। आज सर्विलांस कैपिटलिज्म और टेक्नो-सामंतवाद के जरिए सोच का शोषण किया जा रहा है। पूंजीवाद नई परिभाषाओं से मजदूर वर्ग को अदृश्य करने में लगा है, जिससे सतर्क रहने की जरूरत है।
वहीं मनोज कुमार सिंह, राष्ट्रीय महासचिव, जसम ने कहा कि साम्राज्यवाद नए रूप में उभर रहा है, जो किसी भी देश के राष्ट्रीय कानूनों को मानने से इनकार कर रहा है। रंगकर्मी विनीत तिवारी ने मणिपुर और फिलिस्तीन के अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि मुनाफा पूंजीवादी व्यवस्था का स्थायी तत्व है। जबकि डॉ. जयप्रकाश धूमकेतु ने जोर देकर कहा कि पूंजीवाद की सबसे अधिक मार मजदूरों पर पड़ती है और इससे योजनाबद्ध तरीके से मुकाबला करना होगा।
कार्यक्रम में रामजी सिंह, पीयूष उपाध्याय, रामाश्रय यादव, राम अवतार सिंह, अब्दुल अज़ीम खां, डॉ. संजय राय, मुन्ना प्रसाद, प्रसेन और कन्हैया प्रसाद ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. तेजभान ने किया। वहीं धन्यवाद ज्ञापन बसंत कुमार ने किया। अंत में आंचल और जान्हवी के जनवादी गीतों के साथ गोष्ठी का समापन हुआ। इस दौरान मुख्य रूप से सौम्या चतुर्वेदी, जंगशेर बहादुर राणा, रामभवन प्रसाद, पिंकी उपस्थित रहे। संवाद