महंगाई की मार का असर भवन निर्माण सामग्रियों पर भी पड़ा हे। यही वजह है कि लोगों को मकान बनवाने में पसीने छूट जा रहे। गरीब तो मकान बनवाने की सोच तक नहीं रहा। अहम सामग्री लाल बालू और गिट्टी में ही चार से पांच हजार रुपए की बढ़ोत्तरी हो गई है। उधर, महंगाई के चलते ही सरकारी प्रोजेक्ट भी प्रभावित हो रहे।
बताते चले कि 8 से 9 हजार प्रति ट्राली की दर से बिकने वाली गिट्टी वर्तमान 13 हजार प्रति ट्राली हो गई है। सीमेंट के दाम 340 रुपए से 360 रुपए प्रति बोरी और ईंट 9 हजार से बढ़कर 11 हजार रुपए प्रति ट्राली पहुंच गई है। लाल बालू पिछले साल छह हजार था जो अब 10 हजार प्रति ट्राली पहुंच चुका है। पिछले एक साल में भवन निर्माण सामग्री में 20 फीसदी तक बढ़ोत्तरी के चलते लोगों को मकान बनाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। महंगाई की वजह से जिला मुख्यालय में हो रहे रोडवेज वर्कशाप, रोडवेज नवीन भवन कार्य, नवीन महिला अस्पताल में महंगाई के चलते जहां कार्य काफी धीमी गति से हो रहे है। कीमतें बढ़ने के कारण प्रधानमंत्री आवास योजना के घर और स्वच्छता अभियान के तहत शौचालय बनवाना मुश्किल हो गया है।
भीटी के बिल्डिंग मैटेरियल के विक्रेता जनार्दन शर्मा ने बताया कि सामग्री में जो वृद्धि हुई है वह सरकार की सख्ती का असर है। पहले खनन पर रोक नहीं थी तो सस्ते दरों पर सफेद बालू , गिट्टी बेचा जाता था। अब रोक से सफेद बालू बंद है, जबकि सोनभद्र से आने वाली गिटटी और बिहार से आने वाले लाल बालू से भरी गाड़ियों में कमी आई है।