मऊ। जनपद की 1.5 हजार या उससे कम आबादी वाली ग्राम पंचायतों में विकास कोसों दूर है। इसका कारण आबादी के हिसाब से न बजट मिलना है। एक साल में अधिकतम 1.5 लाख रुपये बजट मिलने से प्रधान, पंचायत सहायक और केयर टेकर का मानदेय देना भी मुश्किल होता है।
मानदेय के लिए अगले वित्तीय वर्ष का इंतजार करना होता है। जनपद के नौ ब्लॉकों में ऐसी 133 ग्राम पंचायतें हैं जहां जलनिकासी, सुगम रास्ता आदि की सुविधा नहीं है। कम आबादी वाली ग्राम पंचायतों की को स्वावलंबी बनाने और खुद राजस्व कमाकर खर्च करने के लिए शासन स्तर पर तेजी से काम चल रहा है।
शासन स्तर पर इन ग्राम पंचायतों को प्रोत्साहन के रूप में धनराशि देने के लिए योजना बनाई जा रही है, जिससे उन्हें निर्धारित से अधिक बजट मिल सके और वहां विकास कार्य कराए जा सकें। इस योजना के तहत ग्राम पंचायतों को राजस्व इकट्ठा कर खाता में जमा करना होगा।
जमा की गई धनराशि पर 10 गुना अधिक प्रोत्साहन धनराशि सरकार देगी। उन पैसों से ग्राम पंचायतें खुद का राजस्व बढ़ाएंगी या विकास कार्यों में खर्च करेंगी। इस योजना के जरिए ग्राम पंचायतों को अपने राजस्व के लिए ज्यादा से ज्यादा संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी, गांव सशक्त बनेगा।
कम 1.5 हजार या कम आबादी वाली ग्राम पंचायतें दुकानों और प्रतिष्ठानों पर टैक्स लगाकर राजस्व बढ़ा सकेंगी, इसके बदले में उन्हें सेवा देनी होगी। जैसे दुकान के आसपास सफाई कराना, रोजाना कूड़ा उठाकर आरआरसी सेंटर तक पहुंचाना है।
पंचायत भवन में चल रहे जनसेवा केंद्र से ग्रामीणों का फार्म भरकर या प्रमाणपत्र जारी करने के बदले में शुल्क लेकर, तालाब या पोखरे की नीलामी या मछली पालन करके आय बढ़ा सकेंगे।
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1.5 हजार आबादी वाली पंचायतें ब्लॉकवार
कोपागंज 18
घोसी 24
बड़राव 09
दोहरीघाट 14
फतेहपुर मंडाव 16
रतनपुरा 10
परदहां 03
रानीपुर 16
मुहम्मदाबाद गोहना 23
कोट -
जनपद की 1.5 हजार आबादी वाली ग्राम पंचायतों में खुद के राजस्व स्रोत बढ़ाने पर काम चल रहा है, जिससे छोटी ग्राम पंचायतों में भी बड़ी पंचायतों की तरह विकास कार्य कराया जा सके।
- सुमित सिंह, प्रभारी जिला पंचायत राज अधिकारी, मऊ