आज तक जो भी कैलेंडर प्रचलन में हैं वह कहीं ना कहीं धार्मिक या उस समयकाल के महापुरुषों के नाम पर हैं। दुर्भाग्य से इन कैलेंडरों में दलित, पिछड़े और यहां तक कि गौतम बुद्ध जैसे महापुरुषों की उपेक्षा की गई है। इसके चलते बुद्धाब्द कैलेंडर की रचना की गई है।
इसके दूसरे वर्ष का प्रकाशन भी हो चुका है। यह बातें बुद्धाब्द कैलेंडर के निर्माणकर्ता डा. रामविलास भारती ने रविवार को गृहस्थ प्लाजा में आयोजित एक प्रेसवार्ता के दौरान कहीं।
डा. रामविलास भारती ने कि कहा कि बुद्धाब्द कैलेंडर आडंबरों से रहित है। इसमें किसी भी तिथि, दिन, महीने, घड़ी, पक्ष को शुभ या अशुभ नहीं माना गया है। यह एक प्रकार का सांस्कृतिक आंदोलन है।
इसके माध्यम से शोषित समाज के महापुरुषों की जो उपेक्षा की गई है उसके बारे में जानने एवं उनके नाम पर उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा के लिए बनाया गया है।
कहा कि मानव विकास एवं उसके इतिहास को जानने तथा सिलसिलेवार उसे संरक्षित रखने के लिए काल गणना का विशेष महत्व है। कहा कि यह कैलेंडर पूरी तरह से तार्किक, विज्ञान, खगोलीय घटनाओं एवं मानवतावाद पर आधारित है।