फतहपुर मंडांव में एकमात्र प्रत्याशी ऐश्वर्या यादव के मैदान में रह जाने की वजह से यहां वोटिंग की नौबत नहीं आने वाली है। अन्य सीटों पर सपा को सत्ता की प्रतिष्ठा कायम रखने के लिए पसीना बहाना पड़ रहा है।
कोपागंज में सास बहू आमने सामने हैं। मान-मनुहार के यत्न शुरू हो गए हैं। अब देखना होगा कि कुर्सी छोड़ने के लिए साल तैयार या बहू। बड़रांव और परदहां में सत्ताधारी दल अपनी हनक दिखाने में लगा है। छह फरवरी को नाम वापसी होनी है। नेता कुछ प्रत्याशियों को मनाकर नाम वापस कराने में लगे हैं। अब क्या होगा यह तो शनिवार शाम के बाद पता चलेगा।
ब्लाक प्रमुख चुनाव को सपा के स्थानीय नेताओं के लिए प्रतिष्ठा का सबब बन गई है। पार्टी ने प्रत्याशियों को नामों की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही सभी ब्लाकों में प्रभारी और सह प्रभारी भी तैनात कर दिए गए हैं, जिन पर जीत सुनिश्चित करने का दारोमदार है।
सबसे अधिक घमासान घोसी ब्लाक में है। यहां सपा विधायक सुधाकर सिंह के पुत्र सुजीत सिंह और मधुबन के बसपा के विधायक उमेशचंद पांडेय के भाई बृजेश पांडेय आमने-सामने हैं। दोनों विधायकों में राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता चरम पर है। उनमें खूनी संघर्ष तक हो चुका है। ब्लाक प्रमुख की कुर्सी दोनों के लिए प्रतिष्ठा का सबब बनी हुई है। प्रशासन भी यहां बेहत चौकस है।
रानीपुर में एमएलसी यशवंत की भयेहू एवं उनके भाई पूर्व ब्लाक प्रमुख अरूण की पत्नी नीति सिंह मैदान में हैं। उनके सामने मुख्तार अंसारी के करीबी माने जाने वाले अनुज कन्नौजिया की मां कौशल्या देवी मैदान में हैं।
यहां भी चुनाव काफी संवेदनशील माना जा रहा है। इसके अलावा परदहां ब्लाक में जेल में निरुद्ध पूर्व ब्लाक प्रमुख रमेश सिंह काका की पत्नी मीना सिंह एवं एमएलसी यशवंत के करीबी डा. अमित की पत्नी मृदुला सिंह मैदान में हैं।
यह साम, दाम, दंड और भेद नीति का खुलकर इस्तेमाल हो रहा है। चुनाव के ठीक पूर्व ब्लाक प्रमुख मनोज राय के हत्या के षड्यंत्र में फंस जाने के कारण यहां की कोपागंज का चुनावी समीकरण सीधा हो गया है।
अब यहां सास ललिता देवी औैर उनकी बहू मंजू आमने-सामने हैं। माना जा रहा है कि इनमें से किसी एक का पर्चा जरूर वापस होगा और निर्विरोध निर्वाचन के आसार हैं। उनके बीच समझौता कराने में सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष शैलेंद्र यादव उर्फ साधू लगे हैं। फतहपुर मंडाव ब्लाक में मुनिया देवी का पर्चा निरस्त होने के बाद चंद्रमणी यादव की पत्नी ऐश्वर्या यादव की अकेले मैदान में रह गई हैं।
दोहरीघाट, मुहम्मदाबाद गोहना, रतनपुरा ब्लाकों में कांटे की लड़ाई है। यहां के प्रत्याशियों की जीत हार पर कई नेताओं के राजनीतिक कद का आकलन होना है। ऐसे में सपा के जिलाध्यक्ष धर्मप्रकाश यादव एवं विधायक जीत के लिए ताकत झोंके हुए हैं। परदहां में सपा का प्रत्याशी नहीं है। बड़रांव में पूर्व ब्लाक प्रमुख के मैदान से हटने के बाद यहां सपा की मुश्किलें बढ़ गई हैं।