नौशेरा के शेर ब्रिगेडियर मुहम्मद उस्मान की शहादत होने के सात दशक बाद भी उनकी स्मृतियों को सहेजा नहीं जा सका है। उनका पैतृक मकान खंडहर में तब्दील हो गया है। खुद से ज्यादा अपने देश की चाहत रखने वाला यह शेर दुश्मनों से लड़ते हुए तीन जुलाई 1948 को दुनिया से चला गया। शनिवार को ब्लाक क्षेत्र के बीबीपुर गांव में उनका शहादत दिवस मनाया जाएगा।
सन् 1948 में कश्मीर को हड़पने के लिये कबायली के वेश में पाकिस्तानी सेना ने आक्रमण कर दिया था। दुश्मनों का मुंहतोड़ जवाब देते हुए नौशेरा बार्डर पर बिग्रेडियर उस्मान शहीद हो गए थे। ब्रिगेडियर मुहम्मद उस्मान का जन्म घोसी क्षेत्र के बीबीपुर गांव में हुआ था। इनके पिता मुहम्मद फारुख पुलिस विभाग में कोतवाल के पद पर थे। प्रारंभिक शिक्षा गांव के प्राथमिक स्कूल में होने के बाद, पिता के वाराणसी में नियुक्त होने के चलते इनका और इनके भाई ब्रिगेडियर गुफरान की इंटर तक की शिक्षा वाराणसी में हुई। बीए की शिक्षा प्रयाग में हुई। यहां पर ये अपने व्यवहार व समाजसेवा के चलते विद्यार्थी संघ के मंत्री चुने गए।
बीए पास होते ही उनका चयन सैंडहर्स्ट सैनिक विद्यालय में हो गया। यहां से पास आउट के बाद सेना में चले गए। देश आजाद होने के बाद प्रथम मुस्लिम ब्रिगेडियर होने का गौरव प्राप्त हुआ। इनकी माताजी स्वतंत्रता आंदोलन के नेता और कांग्रेस के अध्यक्ष रहे डा.एमए अंसारी के परिवार से थी। भारत माता के इस सपूत ने पाकिस्तान के हर लालच को ठुकराते हुए तीन जुलाई 1948 को भारत पाकिस्तान के बार्डर नौशेरा में अपनी बटालियन के साथ वीरता से लड़ते हुए पाकिस्तानियों को खदेड़ कर दम लिया।
आज इनके गांव बीबीपुर में स्थित इनका पैतृक हवेलीनुमा मकान खंडहर में तब्दील हो चुका है। इनके भाई ब्रिगेडियर गुफरान के देहांत के बाद यहां कोई नहीं आता। गांव वालों के अनुसार दशकों से इनके परिवार का कोई सदस्य गांव में नहीं आया है। बीबीपुर गांव निवासी सन्नू आजमी का कहना था कि भारत सरकार ने ब्रिगेडियर को मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया था। शहादत के सात दशक बीत जाने के बाद भी शासन प्रशासन की ओर से उनकी जन्मभूमि पर शहीद स्तंभ बनवाना तो दूर उनकी स्म़ृतियों को सहेजने का प्रयास तक नहीं किया जा सका है। कभी क्षेत्र की शान रही इनका पैतृक मकान जो कोतवाल साहब की कोठी के रूप में प्रसिद्ध है। खंडहर में तब्दील होकर रह गया है। बचपन से जुड़ी वस्तुएं या तो टूट गयी हैं या गायब हैं।