मऊ।
उरी में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान का साथ देने वाले चीन के विरोध में बुधवार को दिवानी कचहरी के अधिवक्ताओं ने वहां के सामानों का बहिष्कार करने का निर्णय किया। साथ ही अधिवक्ताओं ने विरोध-प्रदर्शन किया। ताकि सभी लोग चीन निर्मित सामानों को न खरीदने के लिए जागरूक हो।
अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान का साथ देकर भारत के विरोध में खड़े हुए चीन के व्यापार को प्रभावित करने के लिए धीरे-धीरे लोग लामबंद होने लगे हैं। इस दौड़ में अधिवक्ताओं वर्ग भी शामिल हो गया है। वकीलों ने कहा कि चीन निर्मित सामानों का बहिष्कार करने से वहां की आर्थिक व्यवस्था प्रभावित होगी। तभी चीन को अपनी गलती का एहसास होगा। दीवानी कचहरी के वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीकृष्ण सिंह ने कहा कि देश हित के लिए जो भी करना होगा, उसके लिए हम तैयार है। चीन के सामानों का बहिष्कार होना चाहिए । इससे अपने देश का कुटीर उद्योग मजबूत होगा। साथ ही देश की आर्थिक व्यवस्था भी मजबूत होगी। सिविल कोर्ट सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष शमसुल हसन ने कहा कि चीन में निर्मित सामानों का बहिष्कार होना चाहिए। इसके अलावा भी देश हित में सरकार जो भी निर्णय लेगी उसका पालन किया जाएगा। महामंत्री दारोगा सिंह ने भी चीन के सामानों के बहिष्कार करने का समर्थन किया। कहा कि अगर हम लोग चीन के सामानों का बहिष्कार करेंगे, तो इससे चीन की अर्थ व्यवस्था प्रभावित होगी। इस दौरान अधिवक्ताओं ने चीन के सामानों के बहिष्कार के लिए आम लोगों को जागरूक करने की वकालत की और कचहरी परिसर में नारेबाजी भी की। अधिवक्ताओं ने कहा कि चीनी सामानों के बहिष्कार से स्वदेशी उद्योगों को मिलेगी मजबूती मिलेगी जिससे देश में रोजगार के अवसर बढ़ंेगे। इस मौके पर राजेश सिंह राज, स्वतंत्र सिंह, प्रमोद साहनी, रविकांत चौबे, रामकिशुन गोड़, प्रेमप्रकाश सिंह आदि मौजूद रहे।