जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में विटामिन डी व कैल्शियम की कमी के मरीज दिनोंदिन बढ़ते जा रहे हैं। अकेले जिला नागरिक अस्पताल की हड्डी रोग ओपीडी में पहुंचने वाले मरीजों में 50 प्रतिशत में कैल्शियम व विटामिन डी की कमी मिल रही है।
चिकित्सकों की मानें तो यह चिंता का विषय है। युवा व बुजुर्गों के साथ-साथ अब बच्चों में भी कैल्शियम व विटामिन डी का स्तर गिरता जा रहा है। जिला अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. एसपी नारायण का कहना है कि उनकी ओपीडी में आने वाले रोजाना 50 से अधिक मरीज पहुंचते हैं।
इसमें 15 से 20 में हड्डी कमजोर होने की समस्या सबसे ज्यादा आ रही है। इसमें 50 फीसदी से अधिक महिलाएं हैं, जिनकी उम्र 45 से अधिक है। बताया कि इसके पीछे एक कारण 45 साल की उम्र के बाद महिलाओं में हार्मोन चेंज हो जाते हैं। हड्डी कमजोर मिलने पर अब मरीजों को उपचार देने के साथ-साथ उन्हें जरूरी हिदायतें भी दे रहे हैं।
वहीं, टडियांव स्थित सरकारी अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. पवन कुमार सिंह ने बताया कि उनकी ओपीडी में पहुंचने वाले मरीजों की चिकित्सकीय जांच में इनमें से करीब 40 मरीजों में विटामिन डी व कैल्शियम की कमी मिल रही है।
बताया कि काउंसिलिंग के दौरान पाया जा रहा है कि इनके रूटीन भोजन में दूध व अंडे का कम सेवन करने से ऐसा हो रहा है। वहीं, प्रदूषण के चलते सूर्य देव की किरणों से भी विटामिन डी उचित मात्रा में नहीं मिल रहा।
अवधारणा गलत, दूध का करें सेवन
हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. एसपी नारायण बताते हैं कि कई मरीजों की काउंसिलिंग के दौरान पता चल रहा है कि ये लोग पथरी की समस्या के चलते दूध पीना छोड़ देते हैं। उनकी अवधारणा बन जाती है कि दूध के सेवन से पथरी होगी, लेकिन कैल्शियम साइट्रेट नामक दवा के सेवन से शरीर में कैल्शियम के स्तर को बढ़ावा मिलता है, वहीं पथरी को नहीं बनने देती।