मऊ।अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय महासचिव अतुल कुमार अंजान ने कहा है कि 15 कृषि जिंसों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा के साथ ही सरकार ने इस बात को साफ कर दिया है कि किसानों की जिंदगी को बेहतर बनाने और वर्तमान दौर में जीडीपी में सबसे बड़ी भूमिका निभाने वाले कृषि क्षेत्र को कोई प्राथमिकता नहीं मिलेगी।
एक विज्ञप्ति में उन्होंने कहा कि मंहगाई , पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों और एमएसपी से सरकार का कोई लेना देना नहीं है। किसान नेता ने कहा है कि केंद्र सरकार यह समझती है कि एक चम्मच चीनी भरी नदी में में डाल देने से पूरे नदी का पानी मीठा हो जाएगा, तो वह गलतफहमी में है। केंद्र सरकार द्वारा जारी नीति की आलोचना करते हुए कहा कि स्वयं सरकार के वित्त, सांख्यिकी एवं वाणिज्य विभाग देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति को गंभीर बताते हुए यह कह रहे हैं सिर्फ कृषि क्षेत्र ने ही जीडीपी में योगदान दिया है। इस सच्चाई को स्वीकार करने के बाद भी न्यूनतम समर्थन मूल्य में मात्र 1 से 7 प्रतिशत की मूल्य वृद्धि की गई है। उन्होंने कहा कि सरकारी तेल कंपनियों ने 4 मई से 22 दिनों में वृद्धि कर 5.17 रुपए डीजल और पांच और 5.24 पेट्रोल को महंगा कर दिया। कई राज्यों में बिजली मिलती नहीं और किसानों को मजबूर होकर के 92 की प्रति लीटर डीजल खरीद कर खेती करनी पड़ती है। भारत सरकार के आंकड़ों के मुताबिक वनस्पति तेलों के आयात पर 74 हजार 287 करोड रुपए एवं दलहन के आयात पर 11375 करोड़ रुपए वर्ष 2020 -2021 में खर्च किए गए। किसान नेता ने कहा है कि ऐसी स्थिति में देश को तिलहन और दलहन पर आत्मनिर्भर बनाने के लिए किसानों को प्रोत्साहन के साथ-साथ स्वामीनाथन फार्मूले की बुनियाद पर न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जाना समय की मांग है।