घाघरा में एकाएक उफान आने से कस्बा सहित तटवर्ती इलाकों के लोगों के माथे पर एक बार फिर चिंता की लकीर दिखाई दे रही है। नदी के उग्र होने के आसार से लोगों की नींद उड़ गई है। 24 घंटे में नदी के जलस्तर में 10 सेमी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। नदी के रौद्र रुप धारण करने से ऐतिहासिक धरोहरों तथा तटवर्ती इलाकों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
लगातार पिछले पांच दिनों से घट रही घाघरा के जलस्तर में अचानक वृद्धि होने से एक बार फिर लोगों को नदी के कहरकी चिंता सताने लगी है। शुक्रवार को गौरीशंकर घाट पर जलस्तर 69.50 मीटर रहा। जबकि गुरुवार को जलस्तर 69.40 मीटर था। इस तरह 24 घंटे में जलस्तर में 10 सेमी की बढ़ोत्तरी हुई। अब नदी खतरा बिंदु 69.90 मीटर से 40 सेमी नीचे बह रही है। हालांकि नदी खतरा बिंदु से काफी नीचे है लेकिन जिस तरह से नदी बढ़ी हैं उससे लोग एक बार फिर दहशत में आ गए हैं।
कटानपीड़ितों की मानें तो जब-जब नदी घटती बढ़ती है तब-तब भारी नुकसान हुआ है। घाघरा में उफान आने से नगर स्थित ऐतिहासिक धरोहरे मुक्तिधाम, भारत माता मंदिर, शवदाह स्थल, सरस्वती मंदिर, डीह बाबा का मंदिर,खाकी बाबा की कुटी, जानकी घाट, दुर्गा मंदिर, हनुमान मंदिर, लोक निर्माण का डाक बंगला आदि पर खतरा मंडराने लगा है।
वहीं घाघरा के तटवर्ती इलाके धनौली रामपुर, नई बाजार, नवली, बहादुरपुर, पतनई, सरया, ठाकुर गांव, बीबीपुर ताहिरपुर, सरासो, जमीराचौरादिह, क़ोरौली, बेलौली, पाऊस, ठिकरहिया, महुआबारी, रसूलपुर, सूरजपुर आदि गावो के किसान इस दहशत में हैं कि इस बार घाघरा के बढ़ने से जो फसले बची है वह पानी मे डूबने से फिर बरबाद हो जाएंगी। इस आशंका से किसान चिंतित हैं।