जिला अस्पताल में एंटीरैबीज इंजेक्शन का अभाव होने से मरीज लौट रहे हैं। पिछले एक माह से यह स्थिति बनी है। ऐेसे में वह निजी अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर हैं। डॉग बाइट के करीब 30 से 35 मरीज रोजाना अस्पताल इलाज के लिए पहुंच रहे।
पिछले कुछ महीनों में शहर में कुत्तों और ग्रामीण क्षेत्रों में सियार तथा दूसरे जानवरों का आतंक काफी बढ़ा है, संबंधित नगर पालिका और ग्राम पंचायते इस पर लगाम लगाने में जहां असर्मथ है, वहीं दूसरी तरफ जिला अस्पताल में संवेदनाओं का अभाव है। सदर अस्पताल में इंजेक्शन लगवाने आने वाले मरीजों को बैरंग लौटना पड़ रहा है। अस्पताल के एक कर्मचारी ने बताया कि इंजेक्शन के अभाव में रोजाना 20 से 25 मरीजों को वापस लौटाया जा रहा है। इनमें अधिकांश मरीज जिले के मधुबन, मुहम्मदबाद गोहना और घोसी तहसील के दूर दराज ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले हैं।
सोमवार को कोपागंज के डांडी के महेश ने बताया कि उसके दस वर्र्षीय पुत्र मुकेश को रविवार की शाम कुत्ते ने काट लिया था। सोमवार को सदर अस्पताल में इंजेक्शन लगवाने आया, लेकिन इंजेक्शन न होने से वापस लौटना पड़ा। इस बावत अस्पताल अधीक्षक डा. बृजबिहारी कुमार का कहना है एंटी रैबिज इंजेक्शन का अभाव इन दिनों पूरे प्रदेश के जिला अस्पतालों में है। अस्पताल में ढाई माह पूर्व ही 1000 एंटीरैबिज इंजेक्शन आया था, इससे सदर अस्पताल सहित सीएचसी केंद्रों को भी भेजा गया था। 1000 इंजेक्शन की डिमांग मांग भेजी जा चुकी है, जल्द ही इनके आने की उम्मीद है।