मऊ में शांति भंग की आशंका कर धारा में सोमवार की शाम को जिला कारागार में भेजे गए एक संगठन के पदाधिकारी ने बैरक में भेजे जाने से नाराज होकर डिप्टी जेलर और बंदी रक्षक को कई थप्पड़ जड़ दिया था। जेल की बैरकें रात साढ़े नौ बजे के बाद बंद की जा सकीं। जेल के अधिकारियों ने उच्चाधिकारियों से यह घटना छिपा ली।
सोमवार को कोर्ट से 12 बंदियों की रिहाई का आदेश जारी हुआ था। जिसकी जेल में आमद भी हो चुकी थी, लेकिन बवाल के चलते कैदियों की रिहाई रात दस बजे के बाद हो सकी। जेल के अधिकारियों ने उच्चाधिकारियों से यह घटना छिपाए रखी और उन्हें गुमराह किया। शांति भंग की आशंका में एक संगठन के जिलाध्यक्ष को अस्थाई जेल से जिला कारागार भेजा गया था। लेकिन वह आफिस में ही रहने कली जिद करके विवाद कर बैठा इसली विवाद में उसने डिप्टली जेलर और एक बंदली रक्षक की पिटाई कर दिया।
किन्हीं सूत्रों से पुलिस अधीक्षक को भी जेल के अंदर असामान्य गतिविधि की जानकारी हुई। उन्होंने जेल अधीक्षक से कहा कि अगर जेल में कोई वबाल हो और फोर्स की जरूरत हो तो भेजी जाए लेकिन जेल अधीक्षक ने उनसे भी घटना छिपा ली। इसके पहलेेे भी संगठन का अध्यक्ष एक बार जिला कारागार भेजा गया था तो बैरक में न जाने की बात कहकर बवाल काटा था। इस बाबत जेल अधीक्षक अविनाश गौतम से बात करने का प्रयास किया गया लेकिन उन्होंने सरकारी फोन रिसीव नहीं किया।