मजहबी दूरी से परे एक ऐसा सख्श जो पिछले पचास साल से रमजान माह में रोजा रखने वाले प्रभुनाथ की इन दिनों खासी चर्चा है। नवरात्र में नौ दिनों का व्रत रखकर मां का पूजन भी करते हैं। लोग इनके पास खिंचे चले आते हैं।
मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना... इस लाइन को चरितार्थ कर रहे हैं मऊ के प्रभुनाथ। वे बीते 50 साल से रमजान माह में रोजा रखते चले आ रहे हैं। प्रभुनाथ चैत्र और शारदीय नवरात्र में नौ दिनों का व्रत रखकर विधिवत मां का पूजन करते हैं। 85 वर्षीय प्रभुनाथ के इस कार्य की चर्चा पूरे जनपद में है।
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नगर के मलिकटोला के निवासी 85 वर्षीय प्रभुनाथ सदर चौक पर बर्फ और गट्टा बेचने का काम करते हैं। रमजान माह में सुबह और शाम को बर्फ की सिल्लियों को बेचा करते हैं। प्रभुनाथ ने बताया कि वे मुस्लिम मुहल्ले में निवास करते हैं। वहां पर सभी रमजान माह में रोजा रखते थे। फिर 35 वर्ष की उम्र से उन्होंने भी रोजा रखना शुरु किया।
जो निरंतर आज तक चला आ रहा है। चैत्र और शारदीय नवरात्र में नौ दिनों का व्रत भी रखकर पूजन अर्चन किया जाता है। प्रभुनाथ बताते हैं कि पहले वे मुहल्ले में ही टाफी बिस्कुट बेचा करते थे। फिर सदर चौक पर गर्मी में बर्फ बेचने का कार्य शुरु किया।वहीं ठंड में गट्टा और अन्य सामनों की ब्रिक्री की जाती है।
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होली पर्व को भी उन्होंने खुशी पूर्वक मनाया। बताया कि होली के दिन शाम में इफ्तार करने के बाद सभी से अबीर-गुलाल लगा त्योहार भी मनाया। उन्होंने कहा कि परमात्मा एक है। आपको जिसमें खुशी मिलती है, वह कार्य करने चाहिए। जिंदगी में कब क्या होगा... किसी को नहीं पता।