मऊ। आखिरकार जिला पंचायत राज अधिकारी घनश्याम सागर का स्थानांतरण जिले से हो ही गया। घनश्याम सागर के तबादले की अटकलें महीनों से लग रही थीं। बिना टेंडर के गांवों में विकास कार्यों के लिए ग्राम निधि खातों से रुपये निकालने के मामले में विभाग की किरकिरी हुई थी। इस प्रकरण को लेकर जांच समितियों से जांच कराई गई। जांच में प्रधानों और सचिवों को बचाने के प्रयास के आरोप भी लगाए गए। इसे लेकर महीनों तक चर्चाओं का बाजार गरम रहा। कुछ लोगों की ओर से उच्चाधिकारियों को शिकायती पत्र भी भेजा गया था। जनपद में आए प्रभारी मंत्री सुरेश पासी से डीपीआरओ की कार्यप्रणाली को लेकर कुछ लोगों ने शिकायत की थी।
अहिलाद गांव में मनरेगा के तहत साल 2019-20 में कराए गए इंटरलाकिंग और तीन पोखरियों की खुदाई के मामले में तत्कालीन ग्राम प्रधान धनंजय सिंह झब्बू , सचिव अनुपमा सिंह और एडीओ पंचायत राजेश तिवारी के विरुद्ध हाई कोर्ट के निर्देश पर डीपीआरओ घनश्याम सागर ने सरायलखंसी थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। यह प्रकरण विधान परिषद की वित्तीय एवं अनुशासन विलंब समिति के समक्ष तक पहुचा था। 11 अक्टूबर 2021 को लखनऊ में समिति के सभापति के समक्ष इस प्रकरण की सुनवाई हुई।
समिति ने सीडीओ , डीपीआरओ, जिला कृषि अधिकारी, सीओ सिटी और सरायलखंसी थानाध्यक्ष राम सिंह को लखनऊ बुलाया था। उसी दिन शाम को डीपीआरओ का स्थानांतरण यहां से महोबा के लिए कर दिया गया। मऊ जनपद के डीपीआरओ पद के लिए अभी किसी की तैनाती नहीं हुुई है। बुधवार को डीपीआरओ कार्यालय में सन्नाटा पसरा रहा। डीपीआरओ के तबादले की चर्चा विकास भवन के गलियारों में चलती रही। इसी बीच कुछ लोग डीपीआरओ के तबादले कराने का श्रेय लूटने में व्यस्त दिखे।