मऊ। उपजिलाधिकारी सदर अतुल वत्स ने सदर तहसील के रजिस्ट्रार कानूनगो कार्यालय का निरीक्षण बुधवार की शाम को किया। इस दौरान वयनामे के बाद क्रेताओं का नाम खतौनी अंकित करने के राजस्व अधिकारियों के आदेश के बाद कंप्यूटर में अंकित नहीं किए गए पाए। दो दो साल से खारिज दाखिल के आदेशों की पत्रावलियां बिना कंप्यूटर में चढ़ाए ही लंबित रखी गई मिलीं। इस भारी लापरवाही को देख एसडीएम हैरत में पड़ गए। जो काम अधिकतम 45 दिनों में हो जाना चाहिए , वह दो साल में भी नहीं किया गया। एसडीएम ने इस भारी लापरवाही का जिम्मेदार मानते हुए रजिस्ट्रार कानूनगो ,दो लेखपालों और तहसीलदार के पेशकार को विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि देने का निर्देश दिया।
एसडीएम ने कार्यालय में लंबित पत्रावलियों का अवलोकन किया। एक दो नही 50 ऐसी पत्रावलियां मिलीं जिनमें तहसीलदार अथवा नायब तहसीलदार के नामांतरण के आदेश के दो साल बाद तक आदेश कंप्यूटर में अंकित नहीं किए गए थे। इसके अलावा कई अन्य पत्रावलियां भी एसडीएम के मांगने पर आरके नहीं दिखा सके। एसडीएम ने आरके से पूछा कि तहसीलदार कार्यालय से परवाना आरके आफिस तक आने में कितना समय लगता है। आरके एसडीएम के इस सवाल का जवाब नहीं दे सके। आरके एसडीमके इस सवाल का भी जवाब नहीं दे सके कि इतने लंबे समय से इतनी सारी पत्रावलियां लंबित क्यों रखी गई हैं। एसडीमएने इसे घोर लापरवाही माना ।
एसडीएम ने इस लापरवाही के आरोप में रजिस्ट्रार कानूनगो राम नयन यादव , आरके आफिस में कंप्यूटर पर काम करने वाले लेखपाल सत्येंद्र मिश्रा और वीरेंद्र कुमार तथा तहसीलदार न्यायिक के पेशकार मनोज कुमार को दोषी पाते हुए विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि देने का निदेश जारी कर दिया। इस बाबत एसडीएम अतुल वत्स का कहना है कि कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही कदापि बर्दाश्त नही की जाएगी।