नवरात्र में व्रत रखने वाले श्रद्धालु फलाहार में बांकड़ा दाल, कुट्टू और सिंघाड़े के आटे का इस्तेमाल ज्यादा करते हैं। इसे देखते हुए कुछ मिलावटखोर मोटा मुनाफा कमाने के चक्कर में मिलावट कर रहे हैं, तो कुछ कारोबारी पिछले सीजन के खराब हो चुके आटे को भी खपाने की जुगत में हैं।
आटे के अलावा घी, तिल तेल, चंदन, धूपबत्ती, हवन सामग्री और खोआ की मिठाई में अन्न व अरारोट मिलाया जा रहा है। चैत्र नवरात्र व्रत के बीच जिले में मिलावटखोरों का सिंडिकेट सक्रिय हो गया है।
खाद्य सुरक्षा विभाग की सुस्ती और अभियान के अभाव में मिलावटखोरों के हौसले बुलंद हैं। सबसे ज्यादा लोगों की सेहत के लिए खतरा कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से है, क्योंकि खराब आटे के सेवन से व्रत तो टूटेगा ही, साथ ही फूड प्वाइजनिंग हो सकती है।
आटा खरीदते समय गुणवत्ता पहचान करने का कोई तरीका नहीं है। सबसे अधिक मांग तिल के तेल, मूंगफली, कुट्टू के आटे, मखाना, लावा और घी की है। किराना दुकानदार राकेश, अतुल, अजय ने बताया कि बाजार में सस्ते के चक्कर में कई खराब गुणवत्ता वाली सामग्री मिल जाती है।
कुट्टू का आटा यदि 100 से 120 रुपये में मिले, तो मान लीजिए कि वह मिलावटी है। वहीं, बाजार में सांवा और तिन्नी चावल में भी मिलावट का खेल चल रहा है। उन्होंने बताया कि शुद्ध पैकेट बंद सिंघाड़े का आटा 100 रुपये में आधा किलो मिल रहा है और कुट्टू के पैकेट का आटा भी 100 रुपये में आधा किलो मिल रहा है।
नवरात्र में व्रत करने वालों को बाजार से शुद्ध सामग्री मिले इसके लिए खाद्य सुरक्षा विभाग की तरफ से निरंतर कार्रवाई और चेकिंग अभियान शासन के निर्देश पर चलाए गए हैं। खोवा सहित कई सामग्री जब्त कर कार्रवाई भी हुई है। - एसके मिश्र, सहायक खाद्य आयुक्त