आधार सत्यापन नहीं होने से जनपद के 73,934 किसानों के सामने गेहूं के बीज की लिए मिलने वाली सब्सिडी का संकट खड़ा हो गया है। सत्यापन नहीं होने से किसानों को निजी दुकानों से अधिक मूल्य देकर गेहूं का बीज खरीदना पड़ेगा। सहकारी समितियों से सस्ते दर पर अच्छी गुणवत्ता के बीज उपलब्ध कराने के लिए जनपद के 1,28,981 किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। लेकिन इनमें से अब तक केवल 55047 किसानों के आधार कार्ड का सत्यापन हुआ है। समिति पर जाने के बाद किसानों को बिना बीज लिए बैरंग लौटना पड़ रहा है।
सत्यापन के लिए जिला मुख्यालय स्थित कृषि विभाग का चक्कर काट रहे हैं। जिले में 92 बहुद्देशीय, दो उपभोक्ता और पांच क्रय विक्रय सहकारी समितियां हैं। इस साल रबी सीजन में 8081 क्विंटल गेहूं का बीज वितरीत करने का लक्ष्य है। वर्तमान में 1681 क्विंटल बीज वितरीत हो चुका है और 5132 क्विंटल बीच स्टॉक में बचा है जिसे किसानों में वितरीत करना है। उर्वरकों की बात करें तो इस रबी वर्ष 13,846 मीट्रिक टन डीएपी और 29,059 मीट्रिक टन यूरिया बांटने का लक्ष्य है। नवंबर और अक्तूबर में उर्वरक वितरित करने के लक्ष्य से कहीं अधिक स्टॉक भरा है। नवंबर में 4348 मीट्रिक टन यूरिया और 8046 मीट्रिक टन डीएपी वितरीत करने का लक्ष्य है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में 12,623 मीट्रिक टन यूरिया और 6767 मीट्रिक टन डीएपी की उपलब्धता है।
कालाबाजारी तथा किसानों को गेहूं का बीज उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने पारदर्शिता अपनाते हुए साधन सहकारी समितियों और निजी समितियों पर आधार सत्यापन लागू किया है। केवल वही किसान गेहूं का बीज ले पाएंगे जिनका रजिस्ट्रेशन के साथ आधार सत्यापन हुआ है। जिनके अभी तक सत्यापन नहीं हुआ है वो जिला कृषि कार्यालय पर आकर करा सकते हैं। जिससे उन्हें सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी की सुविधा मिल सके। - सोमप्रकाश गुप्ता, जिला कृषि अधिकारी, मऊ