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Mau News: 35 हजार की आबादी को दिलासा देने के लिए बनाया पुल, एप्रोच बनाना भूले

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सुग्गीचौरी बरहज मार्ग पर बना पुल। - फोटो : संवाद
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मऊ, मधुबन। मधुबन तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत सिसवा में लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड के सुग्गीचौरी बरहज मार्ग पर बना पुल बिना एप्रोच मार्ग के ही बन कर तैयार हो गया है। पुल की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग ग्राम पंचायत पर और ग्राम पंचायत लोक निर्माण विभाग सौंप रहा है।
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सुग्गीचौरी से देवरिया जनपद के बरहज जाने वाली सात किलोमीटर लंबी सड़क पर सिसवा गांव में अप्रैल 2024 में पुल निर्माण शुरू हुआ, जो तीन माह में बनकर तैयार हो गया। पुल बनाने के बाद दोनों तरफ 20-20 मीटर एप्रोच नहीं बनने से आवागमन प्रभावित हो रहा है। इस समस्या को देखते हुए ग्राम पंचायत द्वारा मनरेगा के तहत मिट्टी फेंकवाकर एप्रोच बनवाया गया है, जिससे लोग पुल पर चढ़कर आवागमन कर रहे हैं। सरयू नदी का जलस्तर बढ़ने पर मिट्टी से बना एप्रोच कटने से सिसवा, परसिया देवारा, धरमपुर विशुनपुर, राजीव चौक सहित छह ग्राम पंचायतों का का तहसील मुख्यालय से संपर्क टूट जाएगा। सरयू नदी का जलस्तर बढ़ने पर ग्राम पंचायत धरमपुर विशुनपुर चारों तरफ से बाढ़ के पानी से डूब जाता है। पुल पूरी तरह बन जाने से इस गांव के लोगों के लिए जीवनदायिनी साबित होगी।लाखों रुपये की लागत से 15 फिट ऊंचा पुल तो बना दिया गया है, लेकिन सड़क पूरी तरह बदहाल है। पुल को देखकर ऐसा लगता है कि किसी विभाग ने बजट खपाने के लिए निर्माण कराकर छोड़ दिया है।
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प्रतिक्रिया -

देखने से पता चलता है कि पुल बिना किसी कार्ययोजना के बना दिया गया है, जिसका औचित्य नहीं है। पुल निर्माण में सरकारी धनराशि का बंदरबांट हुआ है। वहां से बाढ़ का पानी भी नहीं निकल पाएगा, जिससे सैकड़ों एकड़ धान की फसल को सुरक्षित किया जा सके।
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चंद्रमणि यादव उर्फ गुड्डू
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पुल को देखकर लगता है कि किसी विभाग ने बजट खपाने के लिए बनवा दिया है। क्योंकि पुल से जरूरी सड़क का मरम्मत कराना था, जगह जगह बने गड्ढे लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं।
प्रशांत गुप्ता
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पुल तो बना दिया गया है, लेकिन एप्रोच नहीं बनाने से सड़क खतरों से खाली नहीं है। बाढ़ आने पर मिट्टी से बना एप्रोच कटकर बह जाएगा और आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाएगा।
नेबूलाल
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बारिश के बाद मिट्टी से बना एप्रोच कीचड़ बन गया है और धीरे धीरे नीचे धंस रहा है। जिम्मेदार पुल बनाने के बाद सड़क की मरम्मत कराना भूल गए। पुल की ऊंचाई सड़क से 15 फिट ऊपर है। पुल के बराबर सड़क बन जाती तो बाढ़ आने के बाद भी आवागमन चालू रहता।
सुनील कुमार
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कोट -
सिसवा ग्राम पंचायत की ओर से पुल का निर्माण कराया गया है। आवागमन के लिए मनरेगा के तहत मिट्टी डलवा दिया गया है। वहां लोक निर्माण विभाग की सड़क नहीं है।
- आरके सिंह, सहायक अभियंता, लोक निर्माण विभाग निर्माण खंड, मऊ

पुल किसने बनवाया ये पता नहीं है। सुग्गीचौरी से बरहज जाने वाली सड़क लोक निर्माण विभाग की है। इस सड़क पर पुल बनाना ग्राम पंचायत का अधिकार नहीं है। एक ही काम के लिए इतनी धनराशि ग्राम पंचायत को नहीं मिलती है। यदि पुल के बाद एप्रोच और सड़क को भी उतनी ऊंचाई तक बना दिया जाता तो, बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए सहूलियत मिल जाती।
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- राजू चौहान, प्रधान प्रतिनिधि, ग्राम पंचायत सिसवा
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