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मनरेगा मजदूर मायूस

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मधुबन। सरकार की ओर से जन कल्याणकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए तमाम कवायद विभागीय लापरवाही के चलते फ्लाप साबित हो रही है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत ब्लाक या तहसील मुख्यालय पर माह के दूसरे बुधवार को लगने वाला मनरेगा निगरानी दिवस का आयोजन न होने से मनरेगा मजदूरों को मायूस लौटना पड़ा। काफी संख्या में घंटों प्रतीक्षा कर मजदूरों को परेशानी का सामना करना पड़ा। आला अधिकारियों से शिकायत भी किया, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो सका।
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थक हारकर घर की ओर रुख करना पड़ा। शासन की ओर से मनरेगा में आ रही तमाम शिकायतों के त्वरित निस्तारण और मनरेगा में गुणवत्ता, पारदर्शिता के लिए प्रत्येक माह के दूसरे बुधवार को तहसील स्तरीय महात्मा गांधी नरेगा निगरानी दिवस उपजिलाधिकारी की अध्यक्षता में होना है। विधानसभा चुनाव के चलते संचालन रोक दिया गया था। चुनाव के बाद तहसील दिवस व थाना दिवस का आयोजन तो शुरू कर दिया, लेकिन मनरेगा निगरानी दिवस का आयोजन नहीं किया गया, लेकिन अब शासन ने नरेगा निगरानी दिवस के आयोजन का फरमान जारी कर दिया। शासन के आदेश पर भारी संख्या में मनरेगा मजदूर अपनी मांगों को लेकर ब्लाक मुख्यालय पहुंचे। विभागीय लापरवाही की स्थिति यह है कि बुधवार को मनरेगा निगरानी दिवस का आयोजन ही नहीं किया गया। दूर दराज से आए मजदूर घंटों प्रतीक्षा करते रहे। अंत में थक हारकर मजदरों को बैरंग लौटना पड़ा। मजदूरों की शिकायत के बाद भी आला अधिकारियों ने गोलमोल जवाब देकर मामले से पल्ला झाड़ते रहे। इस संबंध में मनरेगा निगरानी दिवस आयोजित न करने के मुद्दे पर पूछे जाने पर खंड विकास अधिकारी फतहपुर मंडाव साधु शरण शुक्ला गोलमोल जवाब देकर कन्नी काटते रहे।
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