मऊ। समाजवादी पार्टी की जिला कार्यकारिणी भंग होने के बाद पार्टी में लोकसभा चुनाव से पहले जिलाध्यक्ष की लड़ाई तेज हो गई है। पार्टी के कई कद्दावर सपा जिलाध्यक्ष की कुर्सी पर विराजमान होने का ख्वाब पाल बैठे हैं। आधा दर्जन से अधिक दावेदारों के चलते हाई कमान भी ऊहापोह की स्थिति में है कि इनमें से आखिर किस पर भरोसा जताया जाए कि संगठन में किसी प्रकार की मतभेद की स्थिति न पैदा हो और चुनाव में कार्यकर्ता उस पर विश्वास जताकर पार्टी के नीतियों को लेकर जनता के बीच में जाएं। जिलाध्यक्ष बनने के लिए दावेदारों ने फैक्स वार भी शुरू कर दिया है। वह अपने-अपने समर्थकों से फैक्स भेजवाकर भी समर्थन जता रहे हैं।
बता दें कि 11 जनवरी को सपा जिलाध्यक्ष शैलेंद्र यादव को हटाकर प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पूरी कार्यकारिणी को ही भंग कर दिया। चुनाव के ठीक पहले इस कड़े निर्णय से कार्यकर्ता भी अवाक रह गए कि आखिर किस कारण जिले में हाईकमान को ऐसा निर्णय लेना पड़ा है। हालांकि जिला कार्यकारिणी भंग करने को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में कई तरह की चर्चाएं है। लेकिन सबसे बड़ा कारण प्रत्याशी से तालमेल न बैठा पाना बताया जा रहा है। सपा की जिला कार्यकारिणी भंग होने के बाद पार्टी में जिलाध्यक्ष बनने की कवायद तेज हो गई है। इस रिक्त पद पर काबिज होने के लिए पार्टी के आधा दर्जन दावेदारों ने तो लखनऊ कूच करके सीएम दरबार में अपनी हाजिरी भी लगा दी है। वैसे देखा जाय तो पार्टी में जिलाध्यक्ष के दावेदारों की लंबी फेहरिस्त है लेकिन मुख्य रूप से दावेदारों में पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष एवं युवजन सभा के पूर्व जिलाध्यक्ष लालबहादुर यादव, पूर्व जिला पंचायत अंशा यादव के पति धर्मप्रकाश यादव, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष रवींद्र यादव, देवनाथ यादव, विजय शंकर यादव सहित कई और पार्टी के दिग्गज नेता अपनी पैरवी अपने-अपने राजनीतिक आकाओ से करा रहे हैं। सपा प्रत्याशी एवं राष्ट्रीय सचिव राजीव राय पार्टी में कई दावेदार होने के चलते मूकदर्शक बने हुए हैं। वह भी किसी की पैरवी करने की स्थिति में नहीं हैं। फिलहाल पार्टी के दावेदारों की निगाहें प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री पर टिकी हुई हैं कि आखिर वह इनमें किस दावेदार को जिलाध्यक्ष की कुर्सी पर बैठाते हैं या फिर किसी ऐसे सिपाही पर विश्वास जताते हैं जो अभी दावेदारी की लाइन में न हैं।