मऊ। विकास खंड परदहां, मोहम्मदाबाद गोहना और रानीपुर में मनरेगा के तहत हुए काम में गोलमाल की जांच करने सीबीआई कभी भी जिले में धमक सकती है। ग्राम बचाओ समिति के संरक्षक जगन्नाथ सिंह का दावा है कि इन ब्लाक क्षेत्रों का कोई गांव ऐसा नहीं है जहां 50 से लेकर 100 जाब कार्ड फर्जी न हों। परदहां ब्लाक के बढ़ुआ गोदाम गांव में 58 जाबकार्ड फर्जी हैं। रानीपुर में एक ही पोखरों पर दो संस्थाओं ने कार्य कराया। श्री सिंह का कहना है कि गड़बड़झाला के पर्दाफाश के लिए सीबीआई जांच जरूरी है।
अक्तूबर 2013 में विकास खंड परदहां के बढ़ुआ गोदाम में मनरेगा के तहत 15 लाख रुपये का गोलमाल हुआ। ग्राम प्रधान ने स्थानीय ब्लाक स्तर के कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जी जाबकार्ड पर जहां लाखों रुपये भुगतान करा लिए वहीं शौचालय का निर्माण कराए बगैर धन निकाल लिया। जांच में सभी मामलों का पर्दाफाश हुआ है। इस मामले में प्रधान पर कार्रवाई के साथ ही कई कर्मचारियों को भी सस्पेंड कर दिया गया है। दूसरा मामला इसी ब्लाक के नियामदबल्ली गांव का है। यहां मनरेगा के फर्जी कार्य पर लाखों रुपये का भुगतान भी करा लिया गया है। मामले में स्थानीय अधिकारी जांच भी कर रहे हैं। इसी तरह रानीपुर के फतेहपुर गांव स्थित शंकरजी का पोखरा को सुंदर बनाने के लिए दो संस्थाओं को लगभग एक करोड़ का भुगातन कर दिया गया है लेकिन कार्य न के बराबर हुआ है।
जनवरी 2014 में मोहम्मदाबाद गोहना के नगपुर, भदीड़ और बंदीकला ग्राम पंचायत में सोशल आडिट के दौरान लाखों रुपये का गोलमाल सामने आया। तीनों ग्राम पंचायतों में सोशल आडिट टीम को पूरी पत्रावलियां नहीं मिली। इसके कारण आडिट नहीं हो पाई। आडिट के दौरान जो भी पत्रावली मिली उसी में लाखों रुपये का गोलमाल मिला। कई फर्जी जाबकार्ड पर पेमेंट हुआ है तो कहीं बिना कार्य के धन निकाल लिया गया। इन सभी मामलों की जांच विकास विभाग कर रहा है।