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चंद लोग ही पा रहे योजना का लाभ्ा

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मऊ। सरकार की ओर से एपीएल योजना के तहत जुलाई माह से ही जिले के प्रत्येक गांव में एपीएल कार्डधारकों के लिए गेहूं का आवंटन किया जा रहा है। लेकिन अधिकांश गांवों में इसका वितरण नहीं किया जा रहा है। प्रशासन की ओर से व्यापक रूप से प्रचार-प्रसार न होने के चलते अधिकांश कार्डधारकों को योजना की जानकारी तक नहीं हो पाई है। बड़े व मध्यम किसान जो एपीएल कार्डधारक हैं वह सात किग्रा गेहूं लेने सरकारी कोटे की दुकान पर जाते ही नहीं है। वहीं कुछ गांवों के गिने चुने राशनकार्डधारकों में गेहूं बांटकर इतिश्री कर दिया जा रहा है। आश्चर्यजनक स्थिति यह है कि कार्डधारकों द्वारा गेहूं न लेने के बाद भी प्रशासन की ओर से आवंटित गेहूं को वितरित होना दिखा दिया जा रहा है। वहीं बाकी गेहूं कहां जा रही है इसकी कोई हिसाब-किताब नहीं है। शिकायत के बाद भी मामले की जांच तक नहीं कराई जा सकी है।
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नगरीय तथा ग्रामीण इलाकों के एपीएल कार्डधारकों को सस्ते दर पर गेहूं उपलब्ध कराने के लिए एपीएल योजना शुरू की गई है। जिले में 403286 एपीएल कार्डधारक हैं। योजना के तहत नगर व ग्रामीण इलाकों के प्रति एपीएल कार्डधारकों को सात किग्रा गेहूं 6.65 रुपये की दर से वितरित किया जाना है। विभाग की ओर से प्रत्येक माह की पांच, आठ, 10, 12, 15, 17 की वितरण तिथि निर्धारित की गई है। अक्तूबर माह के लिए 18394.76 क्विंटल तथा अतिरिक्त अनाज 9198.72 किग्रा आवंटन भी कर दिया गया है। लेकिन अक्तूबर माह की पांच तिथियां बीत जाने के बाद भी अधिकांश गांवों में कागज पर ही वितरण का काम हो रहा है। इसके पूर्व प्रतिमाह 27593.48 क्विंटल गेहूं का आवंटन किया जा चुका है। सूत्रों की मानें तो 10 से 20 प्रतिशत कार्डधारकों में ही गेहूं का वितरण किया जा रहा है। जानकारों की मानें तो अधिकांश कोटेदार एपीएल योजना के तहत गोदाम से गेहूं का उठान कर खुले बाजार में पहुंचा दे रहे हैं। प्रशासन की ओर से व्यापक पैमाने पर जागरुकता कार्यक्रम चलाने का काम कागज पर ही चल रहा है।
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