मऊ। जिले में सामान्य से काफी कम वर्षा न होने से भीषण सूखा पड़ गया है। लेकिन जिले के अधिकारियों को किसानों की बरबादी दिखाई नहीं दे रही है। जिले के जिम्मेदार अधिकारी सूखे की सही रिपोर्ट शासन को नहीं भेज रहे हैं। नहरों में पानी नहीं आने से फसल पर असर पड़ा। लेकिन विभाग इसके प्रति सचेत नहीं रहा।
जनपद में अब तक 60 प्रतिशत वारिश कम हुई है। केंद्र सरकार ने 33 प्रतिशत क्षति पर ही सूखाग्रस्त, आपदाग्रस्त घोषित करने का नियम बना रखा है। जिले में धान की फसल की स्पष्ट क्षति 60 प्रतिशत आंकी गई है जब कि अरहर की फसल की शत प्रतिशत जुलाई में ही नष्ट हो चुकी है। सब्जी की खेती में और धान की फसल सूखा के कारण रोगग्रस्त होकर पीली हो गयी है।
रबी की फसल आलू, मटर, चना, मसूर, सरसो की बुआई का मुख्य समय अक्तूबर माह है और खेतों में नमी नहीं है तो इसकी खेती कैसे होगी। इसके अलावा सूखा के चलते कीटाणुओं का प्रकोप फसलों पर हो गया है। इससे फसल बरबाद हो रही है। किसान बाजार से कीटनाशक छिड़क थक चुके है। वर्षा न होने से खेतों में नमी है ही नहीं, किसान खेत में पानी चलाते हैं तो पानी 10 मिनट में ही जमीन सोख ले रहा।
बिजली की अघोषित कटौती व ट्रीपिगं से किसान परेशान हैं, नहरों-माइनरों में पानी टेल तक आज तक नहीं पहुँचा है तो आखिर धान की खेती कैसे बचेगी। जिले में 92500 हेक्टेयर में धान की रोपाई का लक्ष्य था लेकिन जून-जुलाई में बारिश कम होने से जिले में धान की रोपाई 45000 हैक्टेयर भी नहीं हो पायी है। जिले में निजी नलकूप पानी का जलस्तर नीचे खिसकने से पानी देना बन्द कर दिये हैं।
जिले में खुरहट पम्प कैनाल 12वर्षों से बन्द है,दोहरीघाट पम्प कैनाल पूरी क्षमता से कभी नहीं चलती है। शारदा सहायक खंड 32 आजमगढ़ की 34 नहरों में तथा लघुडाल खंड जौनपुर की पांच नहरों में पानी आज तक नहीं आया है। रतनपुरा ब्लाक की नहरों में पानी दो माह से आज तक नहीं आया है। एक ओर जहां सूखे से किसानों की फसलों की क्षति हो रही तो वहीं किसानों के पशु भी रोगों से मर रहे हैं।
उप कृषि निदेशक एसपी श्रीवास्तव ने बताया कि किसान नेता राकेश सिंह ने जनपद को तत्काल सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग किया है। उन्होंने कहा कि पहली अक्तूबर को प्रगतिशील किसानों का प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी से मिलकर पत्रक देकर सूखाग्रस्त जनपद घोषित करने की मांग करेगा।
जनपद को सूखा ग्रस्त घोषित करने के लिए केवल कम वर्षा होना ही पर्याप्त नहीं है। इसके अलावा कई तथ्यों का संकलन कराया जाता है। राजस्व अधिकारियों की रिपोर्ट और गाइड लाइन के अनुसार आख्या शासन को भेजी जाती है। इन सारे तथ्यों का संकलन कराया जा रहा है।
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