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देशी गाय के गोमूत्र और गोबर का प्रयोग से ले सकते हैं अधिक फसल उत्पादन

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मऊ। स्वदेशी जागरण मंच पूर्वी उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ प्रचारक अजय कुमार ने कहा कि आज भारत में ब्लड शुगर में तेजी से आगे बढ़ रहा है। गांव गांव में काम करने वाले लोगों में ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर की बीमारी आम हो गई है।इन सभी बीमारियों के लिए यदि कोई जिम्मेदार है तो वह है जर्सी एवं होलिस्टिक गायों का दूध और रासायनिक उर्वरकों द्वारा उत्पादित होने वाला अनाज। हम तमाम कीटनाशकों का प्रयोग करते है, जो खाद्य पदार्थ के रूप में हमारे शरीर के अंदर प्रवेश कर जाता है और हमें अस्वथ बना देता है।हमारा देश गाय के मामले में सर्वोच्च रहा है। हमारी देसी गाय में देवताओं का वास माना गया है। वास्तव में गाय का दूध रोग नाशक है जबकि जर्सी होलिस्टन आदि गायों का दूध रोग वर्धक है।
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स्वदेशी जागरण मंच पूर्वी उत्तर प्रदेश की तरफ से निकली ग्रामोदय यात्रा नगर में पहुंचने पर पत्र प्रतिनिधियों से बातचीत कर रहे थे।
कहा कि श्वेत क्रांति के नाम पर हमने गायों में नस्ल सुधार कर दिया और देसी गायों को हटाकर जर्सी और होलिस्टन गाय का व्यवहार करना शुरू कर दिया। आज हम एक रोगयुक्त भारत खड़ा कर दिए हैं।आज समय की मांग है हम देसी गाय पालन करें। यदि अभी जर्सी गाय है तो उसकी नस्ल सुधार करने के लिए देसी गाय का सीमन गर्भाधान के समय उपयोग करें। दो पीढ़ियों में ही देसी गाय तैयार हो जाएगी। सरकार भी साहीवाल और गीर गाय जैसी देशी गाय का सीमन हर ब्लॉक में उपलब्ध करा रही है। देशी गाय के गोमूत्र और गोबर का प्रयोग करके हम जैविक खेती कर सकते हैं और अनाज का अधिक कीमत प्राप्त कर सकते हैं। गोमूत्र, गोबर, गुड़ और बेसन का उपयोग करके जीवामृत खाद बना करके अच्छी फसल प्राप्त कर सकते हैं। बीस लीटर पानी, दस किलो गोमूत्र, दस किलो गोबर को मिलाकर कुछ घंटे बाद इसमें चालीस किलो बीज डालकर पांच से छह घटे तक छोड़ दें। इस तरह बीज का शोधन हो जाता है। इसको बीजामृत कहा जाता है। इसी तरह कीटनाशकों के स्थान पर निमास्त्र का प्रयोग करके उत्पादन बढ़ा सकते हैं। पशुओं से फसल को बचाने के लिए गोमूत्र से बने आग्नेयास्त्र का प्रयोग करके फसलों की रक्षा कर सकते हैं।इस पूरी प्रक्रिया में बाजार से कुछ भी नहीं लाते और घर की वस्तुओं का प्रयोग करके न्यूनतम खर्चे में खेती करते हैं। इसी को जुरो बजट खेती भी कहते हैं। इस अवसर पर डॉ.सर्वेश पांडेय, डॉ. चंद्र प्रकाश राय, पंकज तिवारी, विशाल पांडेय, प्रदीप राव, डॉ. प्रशांत पांडेय, शुभम सिंह, मंटू सिंह, भरत यादव, परमानंद आदि उपस्थित रहे।
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