नगर में स्कूली बच्चों को ले जाती मारुति वैन।फाइल फोटो
मऊ। अक्तूबर में भी 58 स्कूली वाहनों के फिटनेस फेल हो गया है। 12 दिन बीतने के बाद भी किसी भी स्कूल संचालक ने फिटनेस प्रमाण पत्र के रिन्यूअल के लिए आवेदन नहीं करने पर एआरटीओ ने इन्हें नोटिस भेजा है।
इस महीने फिटनेस नहीं कराने वाले वाहनों को ब्लैकलिस्टेड कर दिया जाएगा। जिले में सीबीएसई बोर्ड के 542 और यूपी बोर्ड के 436 स्कूल पंजीकृत हैं। लेकिन केवल सीबीएसई बोर्ड के कुछ ही स्कूलों में बच्चों को लाने ले जाने के लिए वाहन लगाए गए हैं। बीते साल जुलाई से अक्तूबर तक फिटनेस नहीं कराने वाले 140 वाहनों को एआरटीओ ने ब्लैकलिस्टेड कर दिया। अगर यह वाहन चलते पाए गए तो उन्हें सील कर दिया जाएगा।
अप्रैल में लगातार स्कूली बसों की टक्कर से मौत के बाद 30 से अधिक वाहनों को सील और कुछ वाहनों का चालान किया गया था। जिसके चलते पिछले साल की तुलना में स्कूल संचालक सचेत हो गए थे। लेकिन अब फिर से लापरवाही सामने आ रही है। इन वाहनों से स्कूल आने-जाने वाले बच्चों को जान जोखिम में डाल कर आवागमन करना पड़ता है।
आश्चर्य की बात ये है कि सीबीएसई बोर्ड के 542 स्कूल हैं और पंजीकृत वाहनों की संख्या 925 है। इससे साफ पता चलता है कि ग्रामीण इलाकों में पंजीकृत स्कूलों में बच्चों को लाने ले जाने के लिए बस और आठ सीटर वाहन नहीं चलाए जा रहे हैं।
अब भी बच्चों को ई-रिक्शा और ऑटो से ढो कर उनकी सुरक्षा से खिलवाड़ किया जा रहा है। इन वाहनों में बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे है।