मऊ। सर्दी शुरू होने के बावजूद परिवहन निगम ने अपनी बसों को नए सीजन के लिहाज से तैयार नहीं किया है। तमाम बसों में शीशे टूटे होने की वजह से मुसाफिर ठिठुरते हुए यात्रा कर रहे। जबकि कोहरे को देखते हुए अभी तक बसों में फॉग लाइन तक नहीं लगाई गई। डिपो के बेड़े में कुल 55 बसें हैं। जो परिवहन निगम की संपत्ति हैं। बावजूद इन बसों में न तो शीशे बदले गए है न ही फाग लाइट लगाने का कार्य किया गया है। इससे बसों में यात्रा करने वाले यात्री सर्द रातों में ठिठुर कर यात्रा करने को मजबूर हो रहे हैं।
आमतौर पर सर्दी का सीजन शुरू होते ही बसों में खिड़कियों पर लगे क्षतिग्रस्त शीशे दुरुस्त करा दिए जाते हैं। इसके अलावा बसों में फॉग लाइट भी लगाई जाती हैं। ओस और कोहरे की वजह से फ्रंट शीशों पर आई नमी दूर करने को बसों में वाइपर भी लगाए जाते हैं। बावजूद मऊ डिपो द्वारा संचालित 55 बसों में नवबंर माह का तीसरा सप्ताह बीतने के बाद बावजूद अभी तक कोहरे में दूर तक देखने के लिए एक भी बसों में फाग लाइट नहीं लगाया गया है। यहीं डिपो के अधिकारियों द्वारा 20 से ज्यादा बसों में क्षतिग्रस्त शीशों को बदलवाया तक नहीं गया है। जिससे शीशे टूटे होने से देर रात में संचालित होने वाली बसों के मुसाफिर फिजूल की मुसीबत झेलते हैं। वहीं, फॉग लाइट न होने की वजह से कोहरे में हादसों की संभावना बढ़ गई है।
इस बाबत एआरएम आरएल पाल ने सभी शीशों को दुरस्त कराने की तो बात कही, लेकिन मुख्यालय से फाग लाइट न आने के चलते बसों में फाग लाइट न लगने की बात स्वीकार की। कहा कि जल्द सभी बसों में फ्रंट ग्लास पर वाइपर के साथ फाग लाइट लगा दी जाएगी।
विभाग को किराए से मतलब, सुविधा से नहीं
मऊ। रोडवेज बसों की क्षतिग्रस्त शीशों से रात के समय यात्रा करने वाले यात्रियों को परेशानी हो रही। लखनऊ से मऊ आए यात्री रामदीन मौर्या ने बताया कि जिस बस में उन्होंने सफर किया है उसकी सीट की खिड़की का शीशा टूटा हुआ था। सर्द हवाओं से बचने के लिए वह रात भर चादर की ओट में छिपा रहा। दोहरीघाट से मऊ आए शिवम गुप्ता ने शीशा टूटे होने के चलते परेशानी की बात कही। गाजीपुर से आए यादवेंद्र राय और बलिया से बस से आए मैनेजर प्रसाद ने टूटी खिड़कियों को लेकर नाराजगी जताई कहा कि विभाग को किराए से मतलब है, लेकिन यात्रियों की सुविधाओं से नहीं।